

जुर्माना: नियमों के उल्लंघन पर 5 हजार से 25 हजार रुपये तक दंड का प्रावधान प्रस्तावित अभियान के तहत।
अभियान: 10 दिनों के भीतर विशेष निरीक्षण तेज करने के निर्देश।
शिकायत: 'जल बेल' पर फोटो और लोकेशन भेजकर सूचना दे सकते हैं।
गोपनीयता: शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने की बात कही गई है।
जांच: अवैध नल कनेक्शन, पाइपलाइन रिसाव, वाल्व और पानी के टैंकरों की जांच होगी।
चेतावनी: पानी की बर्बादी जारी रहने पर प्राथमिकी की कार्रवाई हो सकती है।
Water Wastage Fine And Leak Inspection Drive: छत्रपति संभाजीनगर में पानी की कमी के बीच एक-एक बूंद बचाने के लिए अब महानगरपालिका प्रशासन सख्त कदम उठाने जा रहा है। घरों के बाहर पानी बहाने से लेकर पाइपलाइनों के रिसाव और अवैध नल कनेक्शनों तक, हर स्तर पर जवाबदेही तय होगी।
पानी की बर्बादी करने वालों को पहले चेतावनी मिलेगी, लेकिन इसके बाद भी लापरवाही जारी रही तो पांच हजार से 25 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। बार-बार नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने की भी तैयारी है।
मनपा आयुक्त अमोल येडगे ने अधिकारियों को दस दिनों के भीतर विशेष अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे पानी की बर्बादी रोकने में सहयोग करें और कहीं रिसाव दिखाई देने पर 'जल बेल' के माध्यम से शिकायत दर्ज कराएं।
बुधवार, 21 अक्टूबर को भारतरत्न मौलाना अबुल कलाम आजाद अनुसंधान केंद्र में आयोजित बैठक में आयुक्त ने जलापूर्ति विभाग के अभियंताओं और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि पानी बचाने की जिम्मेदारी केवल नागरिकों की नहीं, बल्कि महानगरपालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों की भी है। पाइपलाइन से पानी बहता मिला या शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो संबंधित व्यवस्था की जवाबदेही तय करनी होगी।
पहले चेतावनी: अभियान के शुरुआती दो से तीन दिनों में पानी बर्बाद करने वालों को समझाइश देकर चेताया जाएगा।
25 हजार तक जुर्माना: इसके बाद भी बर्बादी जारी रहने पर पांच हजार, 15 हजार से लेकर 25 हजार रुपये तक दंड लगाया जा सकता है।
सीधे प्राथमिकी: बार-बार नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दस दिन का अभियान: शहर में रिसाव, खराब वाल्व और अवैध नल कनेक्शनों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
एक सप्ताह में रिपोर्ट: प्रत्येक क्षेत्र में सामने आए रिसाव का विवरण अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर देना होगा।
पानी की बर्बादी रोकने के लिए छत्रपति संभाजीनगर के नागरिकों को भी अभियान से जोड़ने की योजना है। कहीं पाइपलाइन से पानी बहता दिखाई दे, वाल्व से रिसाव हो या सार्वजनिक स्थान पर पानी व्यर्थ बहाया जा रहा हो तो नागरिक 'जल बेल' अनुप्रयोग के माध्यम से शिकायत कर सकते हैं। शिकायत के साथ संबंधित स्थान का फोटो और सटीक स्थान की जानकारी भेजनी होगी।
उपलब्ध संपर्क माध्यम से भी सूचना दी जा सकती है। प्रशासन के अनुसार, शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। इससे रिसाव की जानकारी समय पर मिलने और मरम्मत में तेजी आने की उम्मीद है।
सिडको क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान पानी की बर्बादी सामने आने पर आयुक्त अमोल येगडे ने नाराजगी जताई थी। उन्होंने चेताया था कि यदि पानी का विवेकपूर्ण उपयोग नहीं किया गया तो तीन दिन के अंतराल पर होने वाली जलापूर्ति को सात दिन के अंतराल पर करना पड़ सकता है। ऐसे में पानी की बर्बादी रोकना शहर के लिए और भी जरूरी हो गया है।
अभियान के दौरान अनधिकृत नल कनेक्शनों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। टैंकरों में पानी भरते समय होने वाली बर्बादी रोकने के साथ उनके पंजीकरण क्रमांक और बीमा दस्तावेजों की भी जांच होगी। लाइनमैन और उपअभियंताओं को रोज सुबह अपने क्षेत्र का निरीक्षण करना होगा। पाइपलाइन के रिसाव और टूटे वाल्व की मरम्मत में देरी नहीं चलेगी।