

Chhatrapati Sambhajinagar MRTS: औद्योगिक निवेश, रोजगार और शहरी विस्तार की तेज रफ्तार ने छत्रपति संभाजीनगर के सामने भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अगले 20 से 25 वर्षों में शहर की आबादी करीब दोगुनी और रोजगार के अवसर लगभग तीन गुना होने का अनुमान है।
इसके साथ ही शहर में रोजाना होने वाली यात्राओं की संख्या भी तेजी से बढ़ेगी। व्यापक परिवहन योजना (CMP) के अनुमानों के अनुसार, 2052 तक प्रमुख मार्गों पर यात्री मांग दो से चार गुना तक बढ़ सकती है। ऐसे में मौजूदा सड़क और बस व्यवस्था भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं होगी। इसलिए शहर को अभी से मेट्रो या मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (MRTS) जैसी बड़ी क्षमता वाली सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की तैयारी करनी होगी।
छत्रपति संभाजीनगर में औद्योगिक गतिविधियों का तेजी से विस्तार हो रहा है। नए उद्योगों के साथ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और शहर के बाहरी हिस्सों में नई आवासीय बस्तियां भी विकसित होंगी। शेंद्रा सहित औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ती गतिविधियों का सीधा असर शहर की यातायात व्यवस्था पर पड़ेगा। कर्मचारियों, विद्यार्थियों और अन्य यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ सुबह और शाम के समय प्रमुख सड़कों पर वाहनों का दबाव कई गुना बढ़ सकता है। CMP के अनुसार, अगले 25 वर्षों में शहर की आबादी आज की तुलना में करीब दोगुनी होने का अनुमान है। वहीं रोजगार के अवसर लगभग तीन गुना हो सकते हैं। इसका अर्थ है कि रोजाना बड़ी संख्या में लोगों को शहर के विभिन्न हिस्सों से रोजगार और शिक्षण संस्थानों तक पहुंचना होगा।
शहर की यातायात मांग में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रोजगार और शिक्षा से संबंधित यात्राओं की है। CMP के अनुसार, पीक आवर में होने वाली करीब 75 प्रतिशत यात्राएं रोजगार और शिक्षा से जुड़ी हैं। सुबह कार्यालय और शिक्षण संस्थानों की ओर तथा शाम को वापस घर लौटने के दौरान सड़कों पर सबसे अधिक दबाव रहता है। ऐसे में केवल सड़कें चौड़ी करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। लोगों को समय पर, सुरक्षित और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना जरूरी होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो बढ़ती आबादी के साथ निजी वाहनों की संख्या भी तेजी से बढ़ेगी।
वर्तमान सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की क्षमता भी चिंता का विषय है। CMP के अनुसार, शहर के कई मार्गों पर औसतन केवल दो से तीन बसें उपलब्ध हैं। बसों की आवृत्ति भी करीब 54 मिनट तक है। इतनी कम आवृत्ति वाली बस सेवा के भरोसे आने वाले वर्षों में बढ़ने वाली यात्रियों की संख्या को संभालना मुश्किल होगा। इसी को देखते हुए 2052 तक सिटी बस, फीडर और मास रैपिड ट्रांजिट के संयुक्त तंत्र की क्षमता मौजूदा स्तर की तुलना में करीब पांच गुना बढ़ाने की जरूरत बताई गई है। यानी भविष्य के शहर के लिए केवल अधिक बसें खरीदना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि अलग-अलग परिवहन साधनों को एक नेटवर्क में जोड़ना होगा।
CMP में शहर के लिए एकीकृत मास ट्रांजिट नेटवर्क की परिकल्पना की गई है। इसमें करीब 48 किमी ट्रंक मास ट्रांजिट कॉरिडोर और 320 किमी फीडर कॉरिडोर विकसित करने की संकल्पना है। फीडर नेटवर्क के जरिए यात्रियों को उनके घर और स्थानीय क्षेत्रों से मुख्य परिवहन कॉरिडोर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा सकती है। इसके अलावा रेलवे स्टेशन-शेंद्रा और रेलवे स्टेशन-मुकुंदवाड़ी दिशाओं को जोड़ने वाली करीब 38 किमी MRTS प्रणाली विकसित करने की सिफारिश की गई है। भविष्य में शहर के विस्तार और यात्री मांग के आधार पर इस नेटवर्क का विस्तार किया जा सकता है।
शहर की मौजूदा सड़क व्यवस्था को देखते हुए भी भविष्य की चुनौती स्पष्ट दिखाई देती है। शहर में करीब 42 प्रतिशत सड़कें चार लेन की विभाजित सड़कें हैं। इसके बावजूद करीब 62 प्रतिशत सड़कों पर फुटपाथ की सुविधा नहीं है। इससे पैदल यात्रियों को परेशानी होती है और सड़क पर वाहनों के साथ पैदल यातायात का भी दबाव बढ़ता है। भविष्य की परिवहन नीति में सड़क चौड़ीकरण के साथ फुटपाथ, साइकिल नेटवर्क, बस सेवा, फीडर सेवा और मास ट्रांजिट को एक साथ विकसित करना होगा। इससे लोगों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन अपनाने का बेहतर विकल्प मिलेगा।
CMP में सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को मौजूदा स्तर की तुलना में करीब सात गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। यह लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है जब सार्वजनिक परिवहन तेज, नियमित, सुरक्षित और सुविधाजनक हो। बसों के लंबे अंतराल और सीमित नेटवर्क के कारण लोग निजी वाहनों पर निर्भर होते हैं। इस निर्भरता को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर सार्वजनिक परिवहन का विस्तार जरूरी है। यदि समय रहते यह व्यवस्था तैयार नहीं की गई तो शहर में निजी वाहनों की संख्या बढ़ती जाएगी। इसके परिणामस्वरूप ट्रैफिक जाम, पार्किंग की कमी, प्रदूषण और यात्रा समय बढ़ने जैसी समस्याएं और गंभीर होंगी।
छत्रपति संभाजीनगर के लिए मेट्रो या MRTS को केवल ट्रैफिक कम करने वाली परियोजना के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह शहर के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण आधारभूत सुविधा बन सकती है। तेज सार्वजनिक परिवहन से औद्योगिक क्षेत्रों, रोजगार केंद्रों, रेलवे स्टेशन और आवासीय क्षेत्रों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होगा।
आने वाले वर्षों में जब आबादी दोगुनी, रोजगार तीन गुना और प्रमुख मार्गों पर यात्री मांग दो से चार गुना तक बढ़ने की संभावना है, तब वर्तमान परिवहन व्यवस्था पर निर्भर रहना जोखिम भरा होगा। इसलिए भविष्य के ट्रैफिक संकट का इंतजार करने के बजाय अभी से बड़ी क्षमता वाली सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की नींव रखना जरूरी है। शहर की रफ्तार अब केवल सड़कों की चौड़ाई से तय नहीं होगी। आने वाले छत्रपति संभाजीनगर की रफ्तार इस बात पर निर्भर करेगी कि यहां लोगों को तेज, सुलभ और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन कितनी जल्दी मिलता है।