

Chhatrapati Sambhajinagar Manoj Jarange Maratha Reservation: मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे ने दावा किया है कि उनके खिलाफ भीतर ही भीतर षडयंत्र रचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि तीन महीने शांत रहने का मतलब आंदोलन खत्म होना नहीं है। जरांगे ने 10-15 दिनों में कथित षडयंत्र से जुड़े सबूत सामने लाने की बात कही।
छत्रपति संभाजीनगर. मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे ने अपने समर्थकों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ भीतर ही भीतर षडयंत्र रचा जा रहा है। जरांगे के अनुसार, पिछले तीन महीने से शांत रहने का अर्थ यह नहीं है कि उनका आंदोलन समाप्त हो गया है।
उन्होंने कहा कि आने वाले 10 से 15 दिनों में कथित षडयंत्र के धागेदोरों को सबूतों के साथ सामने लाया जाएगा। हालांकि, इस संबंध में उन्होंने तत्काल कोई विस्तृत सबूत सार्वजनिक नहीं किया।
जरांगे ने कहा कि विरोधियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और उचित समय आने पर संबंधित जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। उन्होंने समर्थकों से किसी भी तरह की अफवाह पर विश्वास नहीं करने और सावधानी बरतने की अपील की।
इससे पहले भी जरांगे आंदोलन के दौरान उन्हें निशाना बनाने और आंदोलन में व्यवधान पैदा करने की कथित साजिश के आरोप लगा चुके हैं। सितंबर में मुंबई की ओर मार्च के दौरान भी उन्होंने इस तरह के दावे किए थे। ये आरोप उनके दावों के रूप में ही सामने आए थे।
जरांगे ने सितंबर में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर 20 दिन तक अनशन किया था। 17 सितंबर को सरकार के साथ बातचीत के बाद उन्होंने अनशन समाप्त किया और सरकार को तीन महीने का समय दिया। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया था कि अनशन स्थगित करने का अर्थ आंदोलन समाप्त होना नहीं है।
उनकी प्रमुख मांगों में ऐतिहासिक प्रशासनिक अभिलेखों के आधार पर पात्र मराठा परिवारों को कुनबी प्रमाणपत्र देने और संबंधित पात्र लोगों को ओबीसी आरक्षण का लाभ उपलब्ध कराने की मांग शामिल है। सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद इन मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था।
अब मनोज जरांगे की ओर से कथित षडयंत्र के सबूत सामने लाने के दावे और सरकार को दी गई तीन महीने की समयसीमा, दोनों पर राजनीतिक एवं सामाजिक हलकों की नजर है। 28 सितंबर को भी जरांगे ने उनके और समर्थकों को बदनाम करने के प्रयासों का आरोप लगाया था।