

छत्रपति संभाजीनगर की कोटला कॉलोनी के जर्जर सरकारी मकान गिराने की तैयारी तेज।
लोक निर्माण विभाग (PWD) ने मकान खाली करने के लिए नोटिस जारी किया।
विभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत, जिलाधिकारी विनय गौड़ा और मनपा के अधिकारी पहुंचे कॉलोनी।
करीब 40 वर्षों से रह रहे परिवारों ने दिवाली के बाद तक कार्रवाई टालने की अपील की।
निवासियों ने वैकल्पिक आवास की व्यवस्था के लिए समय देने की मांग की।
Kotla Colony Chhatrapati Sambhajinagar PWD demolition notice: छत्रपति संभाजीनगर की कोटला कॉलोनी में जर्जर सरकारी मकानों को गिराने की तैयारी तेज हो गई है। लोक निर्माण विभाग ने मकान खाली करने के लिए नोटिस जारी किया है। करीब 40 वर्षों से रह रहे परिवारों ने प्रशासन से दिवाली के बाद तक कार्रवाई टालने और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था के लिए समय देने की अपील की है।
छत्रपति संभाजीनगर शहर की प्रसिद्ध सरकारी आवासीय कॉलोनी कोटला कॉलोनी के जर्जर मकानों को गिराने की प्रशासनिक कवायद तेज हो गई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से नोटिस जारी किए जाने और अधिकारियों के अचानक कॉलोनी पहुंचने के बाद यहां रहने वाले परिवारों में चिंता बढ़ गई है। वर्षों से इन मकानों में रह रहे निवासियों ने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और कम से कम दिवाली तक कार्रवाई टालने की अपील की है।
सरकारी फैसलों पर अमल की प्रक्रिया के तहत विभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत, जिलाधिकारी विनय गौड़ा और महानगरपालिका के अतिक्रमण निरोधक दस्ते के प्रमुख संतोष बहादुरे ने शुक्रवार को संयुक्त रूप से कोटला कॉलोनी का दौरा किया।
अधिकारियों ने कॉलोनी के जर्जर मकानों की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान निवासियों को जल्द से जल्द अपने आवास खाली करने के निर्देश दिए गए। पीडब्ल्यूडी की ओर से जारी नोटिस के बाद मकानों को खाली कराने और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर हलचल तेज हो गई है।
राज्य सरकार ने पहले ही जर्जर कॉलोनी को गिराकर यहां नए प्रशासनिक और आवासीय भवनों के निर्माण को मंजूरी दी थी। हालांकि, लंबे समय से यह परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही थी। अब विभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत के सख्त रुख के बाद इस परियोजना में तेजी आने की बात सामने आई है।
निरीक्षण के दौरान कॉलोनी के निवासियों ने अधिकारियों के सामने अपनी परेशानी रखी। उनका कहना है कि वे पिछले करीब 40 वर्षों से इन मकानों में रह रहे हैं। ऐसे में त्योहार से ठीक पहले मकान खाली करने का निर्देश मिलने से उनके सामने रहने की व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता खड़ी हो गई है।
निवासियों ने कहा कि वे प्रशासन की कार्रवाई का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन अचानक घर खाली करने पर वे अपने परिवारों को लेकर कहां जाएंगे? उन्होंने प्रशासन से अपील की कि उन्हें वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए और कम से कम दिवाली का त्योहार शांति से मनाने का अवसर मिले।
कॉलोनी के परिवारों की मुख्य चिंता यह है कि मकान खाली करने के बाद उनके रहने की व्यवस्था कैसे होगी। प्रशासन ने जल्द आवास खाली करने के निर्देश दिए हैं, जबकि निवासियों ने त्योहार के बाद तक मोहलत देने की मांग की है।
अब देखना होगा कि प्रशासन निवासियों की मांग पर क्या निर्णय लेता है और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था के लिए समय दिया जाता है या नहीं।