

Sambhajinagar Hospital Fire NOC: अस्पतालों में भर्ती मरीजों की सुरक्षा के लिए अग्निशमन व्यवस्था सबसे अहम मानी जाती है, लेकिन छत्रपति संभाजीनगर में यही व्यवस्था सवालों के घेरे में है। अमरावती के जिला महिला अस्पताल के एनआईसीयू में वेंटिलेटर के विस्फोट के बाद लगी आग में तीन नवजात बच्चों की मौत ने अस्पतालों की फायर सेफ्टी को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
इसी बीच मनपा के अग्निशमन विभाग की पड़ताल में शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल घाटी की सुपर स्पेशालिटी इमारत की फायर एनओसी की अवधि समाप्त होने और मिनी घाटी के फायर हौज में पानी नहीं होने का मामला सामने आया है।
इससे भी गंभीर बात यह है कि शहर के 350 से ज्यादा निजी अस्पतालों की फायर एनओसी और अग्निसुरक्षा व्यवस्था का अद्यतन रिकॉर्ड खुद अग्निशमन विभाग के पास उपलब्ध नहीं है।
घाटी अस्पताल में मरीजों की भारी संख्या को देखते हुए अग्निसुरक्षा व्यवस्था का मजबूत और पूरी तरह वैध होना बेहद जरूरी है। अस्पताल के बालरोग विभाग की अग्निशमन व्यवस्था कार्यरत होने की जानकारी दी गई है, लेकिन सुपर स्पेशालिटी इमारत की फायर एनओसी की अवधि समाप्त हो चुकी है।
इसका अब तक नवीनीकरण नहीं कराया गया है। अस्पताल प्रशासन की ओर से नवीनीकरण के लिए प्रक्रिया शुरू करने की बात कही जा रही है। अस्पताल जैसी संवेदनशील इमारत में फायर एनओसी की वैधता समाप्त होना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
आग लगने की स्थिति में मरीजों को स्वयं बाहर निकलना मुश्किल होता है। ऐसे में अस्पताल की अग्निशमन व्यवस्था का हर स्तर पर दुरुस्त होना जरूरी है।
मिनी घाटी में आग पर काबू पाने के लिए अग्निशमन व्यवस्था स्थापित की गई है। इसके लिए आवश्यक हौज भी बनाया गया है, लेकिन उसमें पानी ही उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आग लगने पर फायर सिस्टम को पानी की आपूर्ति कैसे होगी, यह बड़ा सवाल है। उपकरण और पाइपलाइन मौजूद होने के बावजूद पानी का पर्याप्त भंडार नहीं होने पर पूरी व्यवस्था निष्प्रभावी साबित हो सकती है।
शहर में 350 से अधिक निजी अस्पताल संचालित हैं। नियमों के अनुसार 50 से कम बिस्तरों वाले अस्पतालों में आवश्यक अग्निशमन उपकरण और 50 से अधिक बिस्तरों वाले अस्पतालों में स्वतंत्र अग्निशमन व्यवस्था होना जरूरी है। कई अस्पतालों में एक्स्टिंग्विशर और अन्य उपकरण लगे हुए हैं, लेकिन उनकी वैधता, नवीनीकरण और वास्तविक कार्यक्षमता की नियमित जांच होती है या नहीं, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इन अस्पतालों में कितनों के पास वैध फायर एनओसी है और कितनों ने समय पर उसका नवीनीकरण कराया है। अग्निशमन विभाग के पास इसकी एकीकृत और अद्यतन जानकारी नहीं होने से निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
गजानन महाराज रोड स्थित एक अस्पताल की तीसरी मंजिल पर करीब छह महीने पहले एसी में आग लग गई थी। घटना के बाद अस्पताल में भर्ती मरीजों को सुरक्षित स्थान पर ले जाना पड़ा था। इस घटना ने अस्पतालों में अग्निशमन उपकरणों की नियमित जांच और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों की जरूरत को उजागर किया था।
अग्निशमन विभाग ने निजी अस्पतालों की फायर एनओसी की जांच शुरू कर दी है। एनओसी की स्थिति स्पष्ट होने के बाद अस्पतालों का फायर ऑडिट कराया जाएगा।
अग्निशमन विभाग के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती शहर के सभी अस्पतालों की अद्यतन जानकारी जुटाने की है। सरकारी और निजी अस्पतालों में कितनों के पास वैध फायर एनओसी है, कितनों का नवीनीकरण लंबित है और कहां अग्निशमन व्यवस्था में कमी है, इसका पूरा रिकॉर्ड तैयार होने के बाद ही व्यापक कार्रवाई संभव होगी।
छत्रपति संभाजीनगर मनपा अग्निशमन विभाग के उपायुक्त एवं विभागप्रमुख अंकुश पांढरे ने कहा कि घाटी अस्पताल की फायर एनओसी का नवीनीकरण नहीं हुआ है। मिनी घाटी के हौज में पानी नहीं होने से वहां की अग्निशमन व्यवस्था कार्यरत नहीं है। निजी अस्पतालों ने फायर एनओसी ली है या नहीं, इसकी जांच की जा रही है। इसके बाद निजी अस्पतालों का फायर ऑडिट जल्द कराया जाएगा।