

छत्रपति संभाजीनगर में अक्टूबर में ही जंगलों में जलसंकट गहराने लगा।
वनक्षेत्र के 125 से अधिक जलस्रोत टैंकरों से भरे जा रहे हैं।
पांच हजार लीटर क्षमता वाले टैंकरों से जलापूर्ति की व्यवस्था।
14 अक्टूबर तक 22 टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाने की जानकारी।
बढ़ते खर्च की भरपाई के लिए DPDC से निधि की मांग।
Chhatrapati Sambhajinagar Forest Department DPDC funds wildlife tankers: छत्रपति संभाजीनगर जिले में बारिश की कमी के कारण जंगलों में भी पानी का संकट बढ़ गया है। वन विभाग एक अक्टूबर से 125 से अधिक जलस्रोतों को टैंकरों से भर रहा है। बढ़ते खर्च को देखते हुए विभाग ने जिला योजना समिति (DPDC) से अतिरिक्त निधि उपलब्ध कराने की मांग की है।
छत्रपति संभाजीनगर जिले में बारिश की कमी का असर अब केवल खेतों तक सीमित नहीं है। जंगलों में भी पानी का संकट गहराने लगा है और वन्यजीवों के सामने प्यास बुझाने की चुनौती खड़ी हो गई है। आमतौर पर जनवरी-फरवरी में महसूस होने वाली जलकिल्लत इस बार अक्टूबर में ही सामने आने लगी है।
वनक्षेत्रों में प्राकृतिक जलस्रोत सूखने से वन विभाग को टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाना पड़ रहा है। विभाग के अनुसार, तहसील के वनक्षेत्र में 125 से अधिक जलस्रोतों को भरने की व्यवस्था की गई है। इस काम पर बढ़ते खर्च के कारण अब जिला योजना समिति (DPDC) से अतिरिक्त निधि की मांग की जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित वनक्षेत्र के अंतर्गत करीब 69 गांवों के आसपास जंगल फैले हुए हैं। इन जंगलों में नीलगाय, काला हिरण, हिरण, बंदर, खरगोश और ऊदबिलाव सहित कई प्रजातियों के वन्यजीव पाए जाते हैं।
प्राकृतिक जलस्रोतों में पानी कम होने से इन जीवों के सामने मुश्किलें बढ़ रही हैं। पानी की तलाश में वन्यजीवों को दूर तक भटकना पड़ सकता है। ऐसे में जंगलों के भीतर जलस्रोतों को भरकर वन्यजीवों को पानी उपलब्ध कराना जरूरी हो गया है।
वन विभाग ने एक अक्टूबर से जंगलों में स्थित जलस्रोतों को भरने का अभियान शुरू किया है। इसके लिए पांच हजार लीटर क्षमता वाले टैंकरों का उपयोग किया जा रहा है। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, 14 अक्टूबर तक 22 टैंकरों के जरिए जलापूर्ति की जा चुकी थी।
जलस्रोतों तक पानी पहुंचाने के लिए टैंकरों पर निर्भरता बढ़ने से खर्च भी बढ़ रहा है। वन विभाग के सामने चुनौती यह है कि वन्यजीवों के लिए पानी की उपलब्धता बनाए रखने के साथ इस व्यवस्था के लिए जरूरी आर्थिक संसाधन भी जुटाए जाएं।
टैंकरों की बढ़ती दरों के कारण वन विभाग पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। इस खर्च की भरपाई के लिए जिला योजना समिति यानी DPDC से आर्थिक प्रावधान उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है।
यदि जंगलों में प्राकृतिक जलस्रोत सूखते रहे, तो पानी की तलाश में वन्यजीवों के मानव बस्तियों की ओर आने की आशंका भी बढ़ सकती है। ऐसे में वनक्षेत्रों में जलापूर्ति बनाए रखना वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका कम करने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।