

जिला परिषद के कई महत्वपूर्ण विभागों में स्थायी अधिकारियों की कमी।
जलापूर्ति और सिंचाई विभाग का अतिरिक्त प्रभार एक ही अधिकारी के पास।
पंचायत विभाग भी अतिरिक्त प्रभार के भरोसे।
सूखा राहत और ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति के काम प्रभावित होने की आशंका।
स्थायी नियुक्तियां करने की जरूरत पर जोर।
Chhatrapati Sambhajinagar ZP Water Supply Crisis: छत्रपति संभाजीनगर जिले में सूखे और पानी की किल्लत के बीच जिला परिषद के जलापूर्ति, सिंचाई और पंचायत जैसे महत्वपूर्ण विभाग प्रभारी अधिकारियों के भरोसे चल रहे हैं। स्थायी अधिकारियों की कमी से सूखा राहत उपायों की निगरानी और क्रियान्वयन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
जिले में सूखे और पानी की किल्लत के बीच जिला परिषद के अहम विभाग ही प्रभारी अधिकारियों के भरोसे चल रहे हैं। जलापूर्ति, सिंचाई और पंचायत जैसे विभागों में स्थायी अधिकारियों की कमी से प्रशासनिक कामकाज पर असर पड़ने की आशंका है। ऐसे समय में, जब ग्रामीण क्षेत्रों में सूखा राहत और पेयजल व्यवस्था की प्रभावी निगरानी जरूरी है, विभागों में जिम्मेदारियों का अतिरिक्त बोझ चिंता बढ़ा रहा है।
छत्रपति संभाजीनगर जिले में ग्रामीण क्षेत्रों की सूखे की स्थिति को देखते हुए जिला परिषद की ओर से राहत उपायों की समीक्षा के लिए बैठकें की जा रही हैं। लेकिन दूसरी ओर, जलापूर्ति, सिंचाई, पंचायत और रोजगार गारंटी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में स्थायी अधिकारियों की कमी बनी हुई है।
प्रभारी व्यवस्था के चलते जरूरी फैसलों, योजनाओं की निगरानी और उनके क्रियान्वयन में दिक्कत आने की आशंका जताई जा रही है। खासकर पानी की उपलब्धता और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों के लिए इन विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
जलापूर्ति विभाग के प्रभारी कार्यकारी अभियंता बालासाहेब शेलके के बीमार होने के कारण सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता आनंद रुपनर को जलापूर्ति विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
सूखे की स्थिति में जलापूर्ति और सिंचाई दोनों विभागों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। ऐसे में एक ही अधिकारी के पास दोनों विभागों का काम होने से नियमित कार्यों, योजनाओं की निगरानी और निर्णय प्रक्रिया पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है।
पंचायत विभाग के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी के अवकाश पर होने के कारण पिछले महीने से सामान्य प्रशासन विभाग के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी राघवेंद्र घोरपड़े के पास पंचायत विभाग का अतिरिक्त प्रभार है।
पंचायत विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन और विकास कार्यों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में अतिरिक्त जिम्मेदारियों के बीच विभागीय कामकाज किस तरह संचालित हो रहा है, यह अहम सवाल है।
सूखे और पानी की किल्लत के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति, सिंचाई से जुड़े काम और राहत योजनाओं की नियमित निगरानी जरूरी है। ऐसे में महत्वपूर्ण पदों पर स्थायी अधिकारियों की नियुक्ति और विभागों के बीच बेहतर समन्वय से प्रशासनिक कामकाज को गति मिल सकती है।
हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रभारी व्यवस्था के कारण कौन-से विशिष्ट कार्य प्रभावित हुए हैं। इसकी पुष्टि के लिए जिला परिषद प्रशासन का पक्ष और संबंधित विभागों की कार्यप्रगति जानना जरूरी होगा।