Chhatrapati Sambhajinagar: लोक-आदिवासी नृत्यों से सजी सांस्कृतिक विरासत, लोक वाद्यवृंद ने बांधा समां

Folk Tribal Dance Competition: संभाजीनगर जिला युवा महोत्सव में 15 दलों ने लोक-आदिवासी नृत्य प्रस्तुत किए। छह महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने लोक वाद्यवृंद से दर्शकों का मन मोहा।
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छत्रपती संभाजीनगर युवा महोत्सव(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Chhatrapati Sambhajinagar Youth Festival: डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय और शासकीय ज्ञान विज्ञान महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘छत्रपती संभाजीनगर जिला युवा महोत्सव-2026’ में शनिवार को लोक एवं आदिवासी संस्कृति की विविधता देखने को मिली। ‘सृजनरंग’ मंच पर आयोजित भारतीय लोक एवं आदिवासी नृत्य प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने पारंपरिक नृत्यों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विरासत प्रस्तुत की। वहीं मुख्य मंच पर लोक वाद्यवृंद की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को आकर्षित किया।.

राजस्थानी से वारकरी दिंडी तक प्रस्तुतियां

सुबह के सत्र में भारतीय लोक एवं आदिवासी नृत्य की सांघिक प्रतियोगिता वंदे मातरम् सभागृह स्थित ‘सृजनरंग’ मंच पर आयोजित की गई। प्रतियोगिता के लिए 14 महाविद्यालयों ने पंजीयन कराया था, जबकि मंच पर 15 दलों ने अपने नृत्य प्रस्तुत किए।

विद्यार्थियों ने राजस्थानी लोकनृत्य, बंजारा नृत्य, देवी का गोंधल, कोली नृत्य, जागरण-गोंधल और वारकरी दिंडी जैसे पारंपरिक नृत्यों की प्रस्तुति दी। कर्नाटक के तुलुनाडु क्षेत्र की धार्मिक लोककला ‘भूतकला’ भी प्रस्तुत की गई। आदिवासी नृत्य शैलियों में तारपा और ढोल नृत्य के विभिन्न रूपों को विद्यार्थियों ने प्रभावी ढंग से पेश किया।

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छत्रपती संभाजीनगर युवा महोत्सव (सोर्सः सोशल मीडिया)

पारंपरिक वेशभूषा ने खींचा ध्यान

नृत्य प्रस्तुतियों में पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण, संगीत और तालवाद्यों का इस्तेमाल किया गया. विभिन्न नृत्यों के माध्यम से संबंधित समुदायों की संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति से उनके संबंध को प्रस्तुत किया गया. कलाकारों की प्रस्तुतियों को दर्शकों ने तालियों के साथ सराहा. लोक और आदिवासी नृत्यों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विविधता में एकता का संदेश भी दिया गया.

छह महाविद्यालयों ने पेश किया लोक वाद्यवृंद

दोपहर के सत्र में मुख्य मंच पर लोक वाद्यवृंद प्रतियोगिता आयोजित की गई. इसमें छह महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। शिवाजी महाविद्यालय, कन्नड, विवेकानंद महाविद्यालय, वसंतराव नाईक महाविद्यालय, दगडोजीराव देशमुख महाविद्यालय, वालूज, शासकीय ज्ञान विज्ञान महाविद्यालय और देवगिरी महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने लोक वाद्यों के साथ प्रस्तुतियां दीं। वाद्ययंत्रों की ताल और सामूहिक प्रस्तुतियों से माहौल उत्साहपूर्ण रहा। प्रस्तुतियों के दौरान दर्शक भी झूमते नजर आए।

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कुलगुरू ने बढ़ाया कलाकारों का उत्साह

लोक वाद्यवृंद की प्रस्तुति के दौरान विश्वविद्यालय के कुलगुरू डॉ. विजय फुलारी उपस्थित रहे। उन्होंने कलाकारों की प्रस्तुतियां देखीं और उनका उत्साह बढ़ाया। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. वैशाली देशमुख, डॉ. दिलीप महालिंगे, डॉ. विट्ठल मोरे, शैलेश बनसोडे और प्रा. समाधान सातव सहित अन्य उपस्थित थे।

प्रतियोगिता का संयोजन डॉ. सय्यद अब्रार, डॉ. राजू सुरवसे, डॉ. किशोर शिरसाट और नीति कडू पाटील ने किया। जिला युवा महोत्सव में विद्यार्थियों की इन प्रस्तुतियों के माध्यम से लोककला और पारंपरिक वाद्य संगीत को मंच मिला।

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