

छत्रपति संभाजीनगर के औरंगपुरा बस स्टैंड के पास जिला परिषद मैदान में बना महिला शौचालय वर्ष 2017 से बंद।
इस्तेमाल और देखरेख के अभाव में इमारत हो रही जर्जर।
शौचालय का स्विच बोर्ड गायब, बाहरी सीढ़ियां टूटने लगीं।
स्थानीय नागरिकों ने मरम्मत, साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था की मांग की।
Chhatrapati Sambhajinagar Women Toilet Closed Nine Years: छत्रपति संभाजीनगर के औरंगपुरा बस स्टैंड के पास जिला परिषद मैदान में बना सार्वजनिक महिला शौचालय वर्ष 2017 से बंद है। देखरेख के अभाव में इमारत जर्जर हो रही है। स्थानीय नागरिकों ने मरम्मत, सुरक्षा और साफ-सफाई की व्यवस्था कर शौचालय को जल्द शुरू करने की मांग की है।
छत्रपति संभाजीनगर, सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं को शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से औरंगपुरा बस स्टैंड के पास जिला परिषद मैदान में बनाया गया सार्वजनिक महिला शौचालय पिछले 9 वर्षों से बंद पड़ा है। वर्ष 2017 से उपयोग में नहीं आए इस शौचालय की इमारत अब देखरेख के अभाव में जर्जर होने लगी है। इस स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, शौचालय का निर्माण होने के बावजूद इसका उपयोग शुरू नहीं हो सका। लंबे समय से बंद रहने और नियमित देखभाल नहीं होने के कारण इमारत की हालत खराब होती जा रही है। सार्वजनिक सुविधा के लिए बनाए गए इस ढांचे का इस्तेमाल नहीं होने से सरकारी धन के उपयोग पर भी सवाल उठ रहे हैं।
शौचालय परिसर में रखरखाव की कमी साफ नजर आने लगी है। अंदर का लाइट स्विच बोर्ड गायब हो चुका है, जबकि बाहर की सीढ़ियां भी टूटने लगी हैं। स्थानीय नागरिकों ने आशंका जताई है कि यदि सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए, तो शौचालय का लोहे का मुख्य गेट और पानी की टंकी भी चोरी हो सकती है।
औरंगपुरा क्षेत्र में प्रमुख स्कूल-कॉलेज, बस स्टैंड और व्यस्त बाजार होने के कारण रोजाना बड़ी संख्या में महिलाओं की आवाजाही होती है। दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान बाजारों में भीड़ बढ़ने से सार्वजनिक शौचालय की जरूरत और अधिक महसूस होती है। इसके बावजूद सुविधा बंद होने से महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय नागरिकों ने मनपा प्रशासन से मांग की है कि शौचालय की इमारत की तत्काल मरम्मत कराई जाए। साथ ही नियमित साफ-सफाई, सुरक्षा और रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि इसे जल्द से जल्द महिलाओं के उपयोग के लिए शुरू किया जा सके। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या पर कब ध्यान देता है।