छत्रपति संभाजीनगर मनपा में भयंकर बवाल: मेयर कक्ष के बाहर भिड़े सभापति और अफसर, प्रभार छीनने की चर्चा तेज

Chhatrapati Sambhajinagar News: छत्रपति संभाजीनगर मनपा की आम सभा के बाद मेयर कक्ष के बाहर सभापति अनिल मकरिये और अधिकारी संतोष वाहुले में तीखी नोकझोंक हुई। घटना के बाद विभाग प्रभार पर हलचल तेज है।
Anil Makariye
अनिल मरकियेसोर्स: सोशल मीडिया
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Anil Makariye Vs Santosh Wahule: छत्रपति संभाजीनगर मनपा की आम सभा के बाद मेयर के कक्ष के बाहर स्थायी समिति सभापति अनिल मकरिये और लेखाधिकारी तथा अतिक्रमण विभाग प्रमुख संतोष वाहुले के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। दोनों के बीच बढ़ते विवाद को देखते हुए वहां मौजूद नगरसेवकों और पदाधिकारियों ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया।

इस घटना के बाद संतोष वाहुले से अतिक्रमण विभाग का प्रभार हटाए जाने की चर्चा पूरे मनपा परिसर में फैल गई। हालांकि, मनपा आयुक्त अमोल येडगे ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

अनिल मकरिये और संतोष वाहुले में क्यों हुआ विवाद

गुरुवार को सामान्य सभा के बाद महापौर समीर राजूरकर ने विभिन्न विषयों पर चर्चा के लिए अधिकारियों और पदाधिकारियों को अपने कक्ष में बुलाया था। बैठक समाप्त होने के बाद सभापति मकरिये वहां पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने वाहुले से ऊंची आवाज में बातचीत शुरू की और कुछ ही देर में दोनों के बीच तीखी बहस होने लगी। विवाद बढ़ता देख उपस्थित लोगों ने बीच-बचाव किया।

कैमरों के सामने हुआ घटनाक्रम

जिस समय यह विवाद हुआ, मेयर के कक्ष के बाहर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि और कैमरामैन भी मौजूद थे। वे सामान्य सभा के संबंध में मेयर समीर राजूरकर की प्रतिक्रिया लेने के लिए वहां रुके थे। ऐसे में अधिकारी और पदाधिकारी के बीच विवाद सामने आने से प्रशासन के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई। चर्चा है कि स्थिति को देखते हुए मेयर ने उपस्थित लोगों से बाहर जाने का अनुरोध किया।

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प्रभार हटाने की चर्चा, फैसला अस्पष्ट

विवाद के बाद कुछ नगरसेवक और पदाधिकारी आयुक्त अमोल येडगे से मिलने पहुंचे। इसके बाद ही वाहुले से अतिक्रमण विभाग का प्रभार हटाए जाने की चर्चा तेज हो गई। सूत्रों के अनुसार, एक मंत्री ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए आयुक्त से फोन पर चर्चा की और कुछ निर्देश दिए।

हालांकि, छत्रपति संभाजीनगर मनपा आयुक्त अमोल येडगे से प्रभार हटाए जाने के संबंध में संपर्क किया गया तो उन्होंने इसकी पुष्टि नहीं की। इसलिए प्रशासन ने वास्तव में कोई निर्णय लिया है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। इस घटना ने एक बार फिर मनपा में निर्वाचित पदाधिकारियों और अधिकारियों के बीच समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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