2019-2020 का जलशुद्धीकरण संयंत्र बना शोपीस
- Written By: नवभारत डेस्क
- 2020 से शुध्द जल से वंचित सिंदेवाहीवासी
- फलक पर नही किसी भी प्रकार की जानकारी
सिंदेवाही. सिंदेवाही एक तहसील का शहर है और तहसील से बाहर किसी भी गांव जाने के लिए शहर का बसस्टैंड मध्यवर्ती स्थान पर है. इस बसस्टैंड से हजारो प्रवासी आवागमन करते है. एसटी की कई फेरी होती है. सैकडो विद्यार्थी सिंदेवाही में शिक्षा लेने आते है. यहां आए सभी यात्रि और छात्रों की प्यास बुझाने के लिए जिप जिला खनिज विकास कोष के तहत वर्ष 2019-2020 में जलशुध्दीकरण संयंत्र को लगाया. परंतु अबतक उसे शुरू नही करने से वह केवल शोपीस बना है. फलक किसी भी प्रकार का उल्लेख नहीं किया गया है. ठेकेदार का कोई नाम नहीं है. इस परियोजना पर लाखों रुपये खर्च करने की चर्चा है.
जिला खनिज विकास कोष के तहत स्थापित इस जलशुध्दीकरण संयंत्र को लाखों रुपये खर्च कर यात्रियों और एसटी चालकों और वाहकों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है, या उसके नाम पर आर्थिक भ्रष्टाचार करने के लिए लगाया गया यह वास्तव में गुलदस्ते में है. यहां के प्रवासी, चालक व वाहक को पानी के लिए दूकान से नकद भुगतान कर पानी की बोतल लेना पड रहा है. इसके अलावा, एसटी कर्मचारी हर रात इस बस स्टेशन पर रहते हैं और उन्हें रात में पानी की जरूरत महसूस होती है. इससे सरकार के लाखों रुपये बेकार हो गए हैं. और ग्रामीण क्षेत्र स्वच्छ पानी के अभाव में यात्रियों को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है.
स्वच्छ पेयजल पर्यावरण के साथ-साथ नागरिकों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है. यदि उन्हें पीने के लिए स्वच्छ पानी नहीं मिलता है तो नागरिकों को हड्डीयों की बिमारी, मधुमेह, ब्लडप्रेशर, हार्ट अटैक सहित विभिन्न बीमारियों से पीड़ित होने की संभावना है. प्रवासी हर दिन 20 रूपए खर्च कर बाटल खरिद रहे है. परंतु विद्यार्थियों को प्रतिदिन पानी खरिदकर पीना मुश्किल है. इसलिए जल्द से जल्द जलशुध्दीकरण केंद्र संयंत्र शुरू करने की मांग की जा रही है.
