ताडोबा टाइगर रिजर्व में 80 चीतलों का ट्रांसलोकेशन; शिकार के लिए बाघों की भिड़ंत होगी खत्म, जानें पूरा प्लान

Chital Translocation Tadoba: ताडोबा टाइगर रिजर्व में बाघों के लिए शिकार बढ़ाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए 30 चीतलों का आंतरिक स्थानांतरण (ट्रांसलोकेशन) अभियान सफलतापूर्वक शुरू किया गया है।
Tadoba Tiger Reserve Chital Translocation
ताड़ोबा में स्थानांतरित किए गए चीतल (फोटो नवभारत)
Published on: 
Updated on: 

Tadoba Tiger Reserve Chital Translocation: चंद्रपुर जिले के ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व में शिकार प्रजातियों की उपलब्धता को संतुलित करने और बाघों के लिए बेहतर आवास विकसित करने के उद्देश्य से ‘एक्टिव इकोलॉजिकल मैनेजमेंट’ के तहत चीतल (Spotted Deer) के आंतरिक स्थानांतरण अभियान की शुरुआत की गई है। पहले चरण में 30 चीतलों को सुरक्षित रूप से एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया। फेज 2 में 50 चीतल का ट्रांसलोकेशन किया जाएगा। पूरे अभियान के दौरान किसी भी वन्य जीव की मृत्यु या जख्मी नहीं हुआ।

महाराष्ट्र सरकार से 80 चीतलों के स्थानांतरण की अनुमति मिलने के बाद यह अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत कोर क्षेत्र के कोलारा रेंज स्थित जामनी घासभूमि से कोलसा रेंज की कोलसा घासभूमि में चीतलों को बसाया जा रहा है। पहले चरण में 16 चीतलों का स्थानांतरण किया गया जिनमें 9 मादा और 7 नर शामिल थे। वहीं पहले चरण के दूसरे भाग में 14 चीतलों को नए आवास में छोड़ा गया जिनमें 11 मादा और 3 नर थे।

यह पूरा अभियान ताडोबा के फील्ड डायरेक्टर डॉ. प्रभुनाथ शुक्ला के मार्गदर्शन तथा उपनिदेशक (कोर) आनंद रेड्डी के नेतृत्व में संचालित किया गया। मैदानी स्तर पर सहायक वन संरक्षक विवेक नातू और अनिरुद्ध धागे, रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर विशाल वैद्य एवं रुंदन कटकर सहित वन विभाग के कर्मचारियों ने अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

बोमा तकनीक का किया गया उपयोग

चीतलों को पकड़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित ‘बोमा तकनीक’ का उपयोग किया गया। जामनी घासभूमि में बनाए गए विशेष बोमा एनक्लोजर से चीतलों को सीधे विशेष रूप से तैयार किए गए ट्रांसलोकेशन वाहनों में पहुंचाया गया। इन वाहनों के अंदर का डिजाइन इस प्रकार तैयार किया गया था कि यात्रा के दौरान जानवरों को कम से कम तनाव हो और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित रहे। नर और मादा चीतलों को अलग-अलग रखा गया, ताकि उचित लिंग अनुपात भी बना रहे।

Tadoba Tiger Reserve Chital Translocation
ताड़ोबा में स्थानांतरित किए गए चीतल (फोटो नवभारत)

बाघों के लिए बढ़ेगा प्राकृतिक शिकार

वन विभाग के अनुसार, इस पहल से कोलसा क्षेत्र में शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या संतुलित होगी और बाघों के लिए प्राकृतिक शिकार उपलब्धता बढ़ेगी। इससे कोर क्षेत्र की वहन क्षमता (कैरींग कैपेसिटी) में वृद्धि होगी और बाघों का बफर क्षेत्र की ओर पलायन कम होने से मानव-वन्यजीव संघर्ष पर भी नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी।

कम होगा मानव-वन्यजीव संघर्ष

ताडोबा अंधारी टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. प्रभुनाथ शुक्ला ने कहा कि इस प्रयास से कोर क्षेत्र में बाघों को पर्याप्त शिकार मिलेगा जिससे उनका बफर क्षेत्र की ओर जाना कम होगा। बफर क्षेत्रों में बाघों की आवाजाही कम होने से निश्चित ही मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आएगी।

वन कर्मियों की बढ़ती दक्षता

ताडोबा के उपनिदेशक आनंद रेड्डी ने कहा कि बिना किसी बाहरी संस्था की मदद के तकनीकी रूप से जटिल इस अभियान का सफल संचालन ताडोबा प्रबंधन द्वारा किया गया है। यह ताडोबा के वनकर्मियों की बढ़ती दक्षता और आत्मविश्वास का प्रमाण है।

- नवभारत लाइव के लिए अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com