ईंट भट्टा घोटाला (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Rajura Tahsil Illegal Mining: राजुरा तहसील के अंतिम छोर पर स्थित वरोडा गांव के पुलिस पाटिल को अवैध गौण खनिज भंडारण और ईंट भट्ठा प्रकरण में तत्काल निलंबित करने की मांग उठी है। इस संबंध में संजय गांधी निराधार समिति के पूर्व अध्यक्ष उमेश राजुरकर सहित गांव के नागरिकों ने शुक्रवार को तहसीलदार एवं उपविभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मौजा वरोडा के सर्वे नंबर 110 स्थित खेत में पुलिस पाटिल द्वारा अपनी पत्नी के नाम पर बिना किसी शासकीय अनुमति के ईंट भट्ठा संचालित किए जाने का आरोप है। बताया जा रहा है कि इस भट्ठे के लिए बड़े पैमाने पर मिट्टी का उत्खनन कर प्रतिदिन हजारों ईंटों का उत्पादन किया जा रहा है और उनकी बिक्री भी की जा रही है।
नागरिकों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में शासन को मिलने वाला गौण खनिज राजस्व (रॉयल्टी) नहीं भरा जा रहा, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हो रहा है। इसके अलावा संबंधित खेत में लगभग 5 ब्रास रेत का अवैध भंडारण भी पाया गया है, जिस पर करीब 42 हजार रुपये का दंड लगाए जाने की जानकारी सामने आई है।
नागरिकों ने यह भी आरोप लगाया कि शासन द्वारा आदिवासी कोलाम समुदाय को आजीविका के लिए वितरित कृषि भूमि का पिछले 25-30 वर्षों से ईंट भट्ठा व्यवसाय में उपयोग कर उसे बंजर बना दिया गया है। साथ ही दंड व जुर्माने से संबंधित दस्तावेज राजुरा तहसील कार्यालय से गायब होने की भी बात सामने आई है। प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
इस मामले में तहसीलदार द्वारा वरोडा के पुलिस पाटिल को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही दंड व जुर्माने से जुड़े दस्तावेजों के गायब होने के मामले की जांच शुरू कर दी गई है और जल्द ही उचित कार्रवाई की जाएगी।
यह भी पढ़ें – मेलघाट में फिर खेला! कांग्रेस के दिग्गज नेता की भाजपा विधायक संग फोटो वायरल, नजदीकियों ने पार्टी के उड़ाए होश
निवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिस पाटिल जैसे जिम्मेदार पद पर रहते हुए स्वयं अवैध रेत भंडारण और ईंट भट्ठा व्यवसाय संचालित कर पद का दुरुपयोग किया जा रहा है तथा अवैध कार्यों को संरक्षण दिया जा रहा है। इससे प्रशासन की छवि धूमिल हो रही है।