राजुरा में दर्दनाक हादसा: रेलवे ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आई 3 महीने की मासूम मादा तेंदुआ, मौत!
Chandrapur Leopard Dead: राजुरा वन परिक्षेत्र के नलफडी में बल्लारशाह-काजीपेठ रेलवे ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आने से 3 माह की मादा तेंदुआ की मौत हो गई। वन्यजीव प्रेमियों ने सुरक्षा पर सवाल उठाए।
- Written By: रूपम सिंह
तेंदुआ मौत (सोर्स - फोटो नवभारत)
Rajura Forest Range Leopard Dead: राजुरा वन परिक्षेत्र के नियंत्रण क्षेत्र नलफडी अंतर्गत कक्ष क्रमांक-179 में बल्लारशाह-काजीपेठ रेलवे डाउन लाइन पर एक तीन माह की मादा तेंदुआ मृत अवस्था में मिलने से वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों में चिंता का माहौल है। यह घटना 9 जून की रात लगभग 8:15 बजे सामने आई, जब रेलवे ट्रैक के पास तेंदुए का शव देखा गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
वन अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर पंचनामा किया तथा शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। प्राथमिक जांच और शव परीक्षण रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि मादा तेंदुआ तेज गति से गुजर रही ट्रेन की चपेट में आ गई थी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि तेंदुआ गंभीर रूप से घायल हो गया और दुर्घटना के कारण उत्पन्न न्यूरोलॉजिकल शॉक से उसकी मृत्यु हो गई।
वन विभाग के अनुसार मृत तेंदुआ की आयु लगभग तीन माह थी। घटना के बाद क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि बल्लारशाह-काजीपेठ रेलमार्ग वन क्षेत्र से होकर गुजरता है, जहां वन्य प्राणियों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। इसके बावजूद पर्याप्त सुरक्षा उपायों के अभाव में आए दिन वन्यजीव रेल दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
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जानकारों का कहना है कि इस मार्ग पर पहले भी कई वन्य जीवों की मौत ट्रेन की चपेट में आने से हो चुकी है। ऐसे में रेलवे और वन विभाग को संयुक्त रूप से प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। विशेषज्ञों ने संवेदनशील वन क्षेत्रों में ट्रेनों की गति नियंत्रित करने, चेतावनी संकेतक लगाने तथा वन्यजीव गलियारों की पहचान कर विशेष सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की है।
इस मामले में डॉ. एन. पी. तेलंगे, सहायक आयुक्त पशु संवर्धन, लघु पशु सर्व चिकित्सालय, राजुरा ने मृत तेंदुए का शव परीक्षण किया। पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद वन विभाग के नियमों के अनुसार अधिकारियों की उपस्थिति में मृत तेंदुए का अंतिम निस्तारण किया गया। घटना ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, ताकि दुर्लभ वन्य प्राणियों का जीवन सुरक्षित रह सके।
