मानिकगढ़ सीमेंट अल्ट्राटेक माइन जमीन विवाद बढ़ा, उपविभागीय अधिकारी कार्यालय में किसानों ने गटका जहर
माणिकगढ़ सीमेंट कंपनी के खिलाफ किसानों का संघर्ष, जहर सेवन कर आत्महत्या का प्रयास।
Chandrapur News: राजुरा उपविभाग अंतर्गत कोरपना तहसील में माणिकगढ़ सीमेंट कंपनी अल्ट्राटेक की खदान से जुड़े जमीन विवाद ने गंभीर रूप ले लिया है। कुसुंबी गांव के आदिवासी किसानों ने मुआवजा नहीं मिलने का सनसनीखेज खुलासा करते हुए अपनी जमीन वापस करने की मांग को लेकर उपविभागीय अधिकारी कार्यालय में जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। इस घटना से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। यह घटना 13 अप्रैल को दोपहर करीब 130 बजे हुई। पिछले 15 वर्षों से कोलाम व अन्य आदिवासी किसान अपनी जमीन के मुआवजे या जमीन वापसी की मांग को लेकर प्रशासन और कंपनी के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ।
प्रभावितों को चंद्रपुर किया रेफर
जहर सेवन करने वाले किसानों में लच्चू चिन्नू मडावी 55, बांबेझरी, जयराम गंगू मडावी 45, नोकारी, जंगू सोमा पेंदोर 48, कुसुंबी, बालाजी शिडाम 52, नोकारी और मारोती कर्णू तलांडे 55, कुसुंबी का समावेश है। सूचना मिलते ही राजुरा के थानेदार सुमीत परतेकी, सहायक पुलिस निरीक्षक हेमंत पवार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और सभी किसानों को तत्काल राजुरा उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया। इन किसानों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें चंद्रपुर जिला अस्पताल में रेफर किया गया है।
15 वर्षों से जारी है संघर्ष
बताया जा रहा है कि माणिकगढ़ सीमेंट कंपनी अल्ट्राटेक की चूना पत्थर लाइम स्टोन खदान के लिए कुसुंबी क्षेत्र के किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। किसानों ने पिछले 15 वर्षों से आवेदन, ज्ञापन और आंदोलन के माध्यम से अपने हक की मांग की, लेकिन न तो कंपनी की ओर से संतोषजनक कार्रवाई हुई। न ही प्रशासन की ओर से ठोस पहल की गई।
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मुआवजा या जमीन वापसी की मांग को लेकर पहुंचे थे किसान
10 महीने पहले उपविभागीय अधिकारी रवींद्र माने ने सर्वे नंबर 44, 45, 46 और 47 की जमीन की नापजोख के आदेश दिए थे। लेकिन अब तक नापजोख नहीं हो सकी है। जब तक नापजोख पूरी नहीं होगी, तब तक मुआवजा या जमीन का कब्जा नहीं मिल सकता।
