करंजी MIDC के लिए जमीन देने से किसानों का इनकार, 12 गांवों में भूमि अधिग्रहण का विरोध तेज

Chandrapur Farmers Protest: चंद्रपुर जिले की गोंडपिपरी तहसील में प्रस्तावित करंजी MIDC के लिए 12 गांवों में भूमि अधिग्रहण का विरोध तेज हो गया है।
karanji midc land acquisition farmers protest chandrapur
चंद्रपुर किसान आंदोलन(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Highlights:

  • चंद्रपुर जिले के गोंडपिपरी तहसील के 12 गांवों में करंजी MIDC के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण का किसानों ने विरोध किया है।

  • किसानों ने स्पष्ट कहा कि वे अपनी खेती की जमीन देना ही नहीं चाहते, इसलिए मुआवजे की दर पर चर्चा करने का कोई औचित्य नहीं है।

  • किसानों ने मापणी के लिए खेतों में आने वाले अधिकारियों को प्रवेश नहीं देने की चेतावनी दी है।

Karanji MIDC Land Acquisition: करंजी एमआईडीसी के लिए प्रस्तावित 12 गांवों में जमीन की संयुक्त मापणी को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को गोंडपिपरी तहसील कार्यालय में जिला प्रशासन, विधायक और किसानों की संयुक्त बैठक हुई।

इस दौरान किसानों ने दोटूक शब्दों में कहा, "हमें अपनी खेती की जमीन देनी ही नहीं है, तो मुआवजे की दर पर चर्चा का सवाल ही नहीं उठता।" किसानों ने मापणी के लिए खेतों में आने वाले अधिकारियों को प्रवेश नहीं देने की भूमिका भी स्पष्ट की। करंजी एमआईडीसी के तहत 12 गांवों में भूमि अधिग्रहण के लिए संयुक्त मापणी की चर्चा से किसान पहले ही चिंतित हैं।

प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपए की दर घोषित

इसी बीच सरकार की ओर से प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपए की दर घोषित किए जाने से विवाद और गहरा गया है। किसानों का कहना है कि वे जमीन देने के लिए तैयार ही नहीं हैं। उन्होंने व्यक्तिगत सुनवाई रोककर सभी प्रभावितों की सामूहिक जनसुनवाई कराने की मांग भी उठाई। किसानों की ओर से सचिन फुलझेले, मारोती भोयर, कमलेश निमगडे, राजेश कवठे, संजय वडस्कर, सुरज माडूरवार, राजू झाडे, माधव लडके और कल्पेश खरबनकर सहित शेतकरी एकता कृति समिति तथा औद्योगिक कृति संघर्ष समिति के पदाधिकारी, 12 गांवों के नागरिक और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।

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दिवाली के बाद आगे की प्रक्रिया

बैठक में जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के निर्णय के अधीन रहते हुए दिवाली के बाद आगे की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। प्रशासन ने किसानों को इसी संबंध में निर्देश दिए। बैठक में विधायक देवराव भोंगले, जिलाधिकारी वसुमना पंत, जिला पुलिस अधीक्षक आयुष नोपानी, उपविभागीय अधिकारी आकाश वर्मा, तहसीलदार शुभम बहाकर, उपविभागीय पुलिस अधिकारी सत्यजित आमले और गोंडपिपरी के थानेदार हेमंत पवार सहित विभिन्न विभागों के प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे।

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विकास के लिए उद्योग जरूरी : विधायक

विधायक देवराव भोंगले ने कहा कि वे गोंडपिपरी तहसील के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनके अनुसार, औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के बाद ही क्षेत्र का सर्वांगीण विकास संभव है। हालांकि, बैठक में किसानों ने अपनी जमीन नहीं देने की भूमिका पर कायम रहते हुए मापणी और व्यक्तिगत सुनवाई को लेकर आपत्ति जताई।