

Gondpipri Gram Panchayat Election: राज्यभर में सोमवार को प्रारूप मतदाता सूचियां प्रकाशित होते ही लंबे समय से टली ग्राम पंचायत, जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों की चर्चा फिर तेज हो गई है। इसी बीच गोंडपिपरी तहसील की मतदाता सूची में कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार के छोटे भाई किशोर वडेट्टीवार और उनकी पत्नी गीता वडेट्टीवार के नाम अलग-अलग गांवों में दर्ज होने का मामला सामने आया है। इससे स्थानीय राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। प्रारूप मतदाता सूची के अनुसार किशोर वडेट्टीवार का नाम करंजी गांव में, जबकि उनकी पत्नी गीता वडेट्टीवार का नाम पानोरा गांव में दर्ज है।
खास बात यह है कि किशोर वडेट्टीवार वर्तमान में गड़चिरोली शहर में रहते हैं। ऐसे में उनका नाम गोंडपिपरी तहसील की मतदाता सूची में सामने आने से स्थानीय स्तर पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। विजय वडेट्टीवार का करंजी गांव से पुराना संबंध रहा है। उनके पिता नामदेवराव वडेट्टीवार करंजी के सरपंच रह चुके हैं, जबकि उनके भाई विलास वडेट्टीवार उपसरपंच रहे हैं। गांव के विकास में वडेट्टीवार परिवार की भूमिका रही है। विजय वडेट्टीवार ने भले ही कम उम्र में गांव छोड़ दिया हो, लेकिन गांव से उनका जुड़ाव आज भी कायम बताया जाता है।
अब प्रारूप मतदाता सूची में परिवार के सदस्यों के नाम सामने आने से आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। विशेष रूप से करंजी-धानापुर जिला परिषद क्षेत्र महिलाओं के लिए सामान्य वर्ग में आरक्षित है। ऐसे में पहले गीता वडेट्टीवार का नाम जिला परिषद चुनाव के लिए चर्चा में आने के बाद अब मतदाता सूची में उनका नाम पानोरा में दर्ज होना राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है क्या, इस पर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। अब इस प्रकरण की ओर सभी का ध्यान लगा हुआ है।
करंजी ग्राम पंचायत में सरपंच पद का आरक्षण सामान्य वर्ग के लिए है। प्रस्तावित करंजी एमआईडीसी के कारण ग्राम पंचायत चुनाव का महत्व और बढ़ गया है। ऐसे में स्थानीय राजनीति में यह भी चर्चा है कि मतदाता सूची में हुई यह 'एंट्री' आगामी ग्राम पंचायत चुनाव को ध्यान में रखकर तो नहीं की गई।
प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद अब ग्रामीणों और राजनीतिक दलों की आपत्तियों पर सभी की नजरें टिकी हैं। किशोर वडेट्टीवार और गीता वडेट्टीवार के नामों को लेकर आने वाले दिनों में कोई आपत्ति दर्ज होती है या नहीं, इसे लेकर गोंडपिपरी की राजनीतिक फिजा गरम हो गई है। चुनावी समीकरणों के बीच इस 'हाईप्रोफाइल एंट्री' का आगे क्या असर होता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।