

Yavatmal Zilla Parishad Employees Credit Society: यवतमाल जिला परिषद कर्मचारी सहकारी पतसंस्था की 62वीं वार्षिक आमसभा रविवार को वणी के शेतकरी भवन में आयोजित की गई। आगामी छह माह में संस्था के चुनाव होने की संभावना के चलते संचालक मंडल की यह अंतिम वार्षिक आमसभा मानी जा रही थी।
सभा में एक ओर संस्था की आर्थिक प्रगति और सदस्यों को 14 प्रतिशत लाभांश देने की घोषणा की गई, वहीं दूसरी ओर बढ़ते एनपीए, कथित भ्रष्टाचार, बोगस निवेश और नियमबाह्य कर्मचारी भर्ती के मुद्दों को लेकर विरोधी सभासदों ने जमकर विरोध किया।
इससे सभा का माहौल काफी गरमा गया। संस्था के अध्यक्ष महेश सोनेकर ने सदस्यों के भाग भांडवल पर 14 प्रतिशत लाभांश देने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि 5 सितंबर शिक्षक दिवस से शाखा स्तर पर लाभांश का वितरण शुरू किया जाएगा।
संस्था के मुख्य कार्यालय के साथ पुसद, वणी, दारव्हा, आर्णी और पांढरकवड़ा शाखाओं में भी लाभांश वितरित किया जाएगा। इसके लिए सदस्यों से स्थानीय पता और मोबाइल नंबर संस्था में अद्ययावत कराने की अपील की गई।
अध्यक्ष ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में संस्था की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि सदस्यों के हित में कर्ज की ब्याज दर में आधा प्रतिशत की कमी की गई है। अब गृह ऋण 9 प्रतिशत तथा संपत्ति गिरवी कर्ज 10 प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। संस्था द्वारा अधिकतम 50 लाख रुपये तक का कर्ज एक दिन में उपलब्ध कराने की जानकारी भी दी गई।
जिला परिषद कर्मचारी सहकारी पतसंस्था संस्था की ओर से बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में योजना के तहत 28 मृत सदस्यों के वारिसों को करीब 2 करोड़ 28 लाख रुपये का भुगतान किया गया। सभा में उपाध्यक्ष संजय गावंडे, संचालक शरद धागोड, मुकेश भोयर, अशोक चटप,विनोदकुमार कदम, गजानन पांगाम, तुषार आत्राम, प्रदीप मोहिते, नदीम पटेल, अभिजीत ठाकरे, स्वप्नील फुलमाली, विलास टांग, सचिन टाकले, तेजस तिवारी, मुनिता गुडघाणे, विजया राऊत सहित बड़ी संख्या में सभासद उपस्थित थे। विरोध दर्ज कराने वालों में आसाराम चव्हाण, अनिल सरताबे, अजय अक्कलवार, प्रवीण राणे, सचिन गायकवाड़ सहित अन्य सभासद शामिल थे।
यवतमाल जिला परिषद कर्मचारी सहकारी पतसंस्था सभा की शुरुआत में ही कुछ सभासद काले कपड़े और काले दुपट्टे पहनकर पहुंचे, सभासदों का आरोप था कि चुनाव करीब होने तथा 17 संचालकों की अपात्रता का मामला उच्च न्यायालय में लंबित होने के बावजूद जल्दबाजी में कर्मचारी भर्ती की गई। इस भर्ती में करीब 4 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार का आरोप भी लगाया गया।
सभासदों ने 70 करोड़ रुपये की कथित बोगस निवेश, 50 करोड़ रुपये के एनपीए, दुर्घटना बीमा प्रकरण में कथित कमीशन, बोगस मुनाफा, कल्याण निधि में 8 करोड़ रुपये का नुकसान, संचालक अग्रिम और अत्यधिक खर्च सहित कई मुद्दे उठाए। इन सवालों के जवाब देने में संचालक मंडल असमर्थ होने का आरोप लगाते हुए सभासदों ने आक्रामक रुख अपनाया।