रोशन कुडे ने मांगी इच्छामृत्यु (सौजन्य-नवभारत/सोशल मीडिया)
Euthanasia Demand Roshan Kude: साहूकारी कर्ज के जाल में फंसे एक किसान की दर्दनाक कहानी चंद्रपुर जिले से सामने आई है। कर्ज के बोझ से परेशान होकर कंबोडिया जाकर अपनी किडनी बेचने को मजबूर हुए किसान रोशन कुडे अब इच्छामृत्यु की अनुमति मांग रहे हैं। “अगर न्याय नहीं मिल रहा तो जीकर क्या करूं?”- यह सवाल उन्होंने प्रशासन के सामने रखा है, जिससे जिले में हड़कंप मच गया है।
नागभीड तहसील के मिंथूर गांव निवासी किसान रोशन कुडे आज व्यवस्था की विफलता को उजागर कर रहे हैं। अवैध साहूकार के कर्ज में फंसकर उन्हें अपनी किडनी बेचने के लिए विदेश तक जाना पड़ा था। यह मामला सामने आने के बाद राज्यभर में चर्चा हुई, लेकिन आज भी उन्हें राहत नहीं मिल पाई है।
विधानसभा के बजट सत्र में मुख्यमंत्री ने अवैध साहूकारों की संपत्ति जब्त करने और किसानों को राहत देने के निर्देश दिए थे, लेकिन डेढ़ महीने बाद भी जिला प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप रोशन कुडे ने लगाया है। जिस खेती पर उनका जीवन निर्भर है, वह अब भी उनके कब्जे में नहीं है।
इस स्थिति से हताश होकर उन्होंने इच्छामृत्यु (Euthanasia) की अनुमति मांगी है। नागरिकों का कहना है कि अगर एक किसान को न्याय के लिए इस हद तक जाना पड़े, तो यह प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है। हाल ही में पदभार संभालने वाली नई जिलाधिकारी वसुमना पंत इस मामले में क्या कदम उठाती हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
रोशन कुडे को सरकार की ओर से न्याय दिलाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज भी उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है। पुलिस जांच शुरू तो हुई, लेकिन क्या ठोस सबूत मिले हैं या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। किसान संगठनों का सवाल है कि यदि कर्ज के कारण किसानों को किडनी बेचनी पड़े और सरकार केवल सीमित कर्जमाफी तक सीमित रहे, तो किसान आखिर न्याय के लिए कहां जाएं?
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नागभीड़ तहसील के मिंथूर के किसान रोशन कुडे ने कहा, “मैं पिछले चार महीनों से न्याय के लिए भटक रहा हूं। मेरी खेती चली गई, मेरा शरीर भी कमजोर हो चुका है। मुख्यमंत्री ने आदेश दिए, लेकिन यहां के अधिकारी कुछ भी करने को तैयार नहीं हैं। अगर मुझे मेरी जमीन और न्याय नहीं मिला, तो अब मुझे जीने की इच्छा नहीं है। जिलाधिकारी मुझे इच्छामृत्यु (Euthanasia) की अनुमति दें।”