कोल माइंस सेवानिवृत्त कामगार संघ ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा, ग्रेज्युटी भुगतान में भेदभाव का आरोप
Chandrapur News: सेवानिवृत्त कोयला खदान मजदूर संघ ने ग्रेज्युटी सीमा 20 लाख करने की मांग पर कोर्ट में याचिका दायर की। पहली सुनवाई 19 अगस्त 2025 को हुई। मामला अधिनियम संशोधन पर आधारित है।
- Written By: आकाश मसने
कॉन्सेप्ट फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
Coal Miners Gratuity Petition News: सेवानिवृत्त कोयला खदान मजदूर संघ बल्लारपुर द्वारा ग्रेज्युटी को लेकर कोर्ट में याचिका दायर किया है। जिसकी प्रथम सुनवाई 19 अगस्त 2025 को हुई। रिट याचिका संख्या 4600/2025 पर कार्यवाही प्रारंभ हुई है।
याचिकाकर्ता द्वारा कहा गया कि 3 अगस्त 2017 ग्रेज्युटी भुगतान अधिनियम 1972 की धारा 4 की उपधारा-3 में संशोधन के फलस्वरूप भारत सरकार की अधिसूचना जिसने अन्य बातों के साथ-साथ ग्रेज्युटी की अधिनियम सीमा को बढ़ाकर 10 लाख रुपये से 20 लाख रुपये करने का प्रावधान है। 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों पर भारत सरकार द्वारा लिए गए प्रमुख निर्णय है।
क्या है मामला?
27 मार्च 2018 प्रतिवादी विभाग के गैर-कार्यपालक कर्मचारियों के सम्बन्ध में प्रतिवादियों द्वारा ग्रेच्युटी भुगतान की अधिकतम सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का प्रावधान 29 मार्च 2018 से किया गया है।
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प्रतिवादियों ने केन्द्र सरकार के कर्मचारियों को 1 जनवरी 2016 से ग्रेज्युटी भुगतान का लाभ दिया है और प्रतिवादी विभाग के अधिकारियों को 1 जनवरी 2016 से ग्रेज्युटी भुगतान का लाभ दिया है। प्रतिवादी अधिकारियों को 1 जनवरी2017 से उनके वेतन संशोधन से लाभ दिया है और गैर-कार्यकारी कर्मचारियों को समान लाभ से वंचित कर दिया तथा 29 मार्च 2018 से लाभ प्रदान किया है।
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प्रतिवादी ग्रेज्युटी का लाभ देने में दोहरे मापदण्ड अपना रहे है। प्रतिवादी ने अपने संगठन के अन्य लोगो की तुलना में गैर कार्यकारी कर्मचारियों के प्रति भेदभावपूर्ण मापदंड लागू किए है जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।
प्रतिवादियों का नोटिस जारी
न्यायालय ने प्रतिवादियों का नोटिस जारी किया है कि, क्या वे ग्रेज्युटी का लाभ देने में दोहरे मापदंड अपना रहे है और साथ ही प्रतिवादी ने अपने संगठन के अन्य लोगो की तुलना में गैर-कार्यकारी कर्मचारियों के प्रति भेदभावपूर्ण मापदंड लागू किए हैं, जो भारतीय सविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 का उल्लघन है।
उच्च न्यायालय ने प्रतिवादियों को 19 अगस्त 2025 को आठ सप्ताह के भीतर जवाब देने के देन के लिए नोटिस जारी किया है। इस मामले का प्रतिनिधत्व शम्भू विश्वकर्मा उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय याचिकाकर्ता संघ की ओर से अधिवक्ता मनोज कुमार मिश्रा ने किया है।
