भाजपा से हाथ मिलाना, उद्धव से गद्दारी! चंद्रपुर के 6 पार्षदों के खिलाफ कड़े तेवर; अपनों को भी नहीं बख्शेगी UBT

Chandrapur Municipal Corporation Election: चंद्रपुर मनपा में 'उबाठा' पार्षदों पर गिरेगी गाज! संजय राऊत ने भाजपा के साथ सत्ता में बैठने को बताया विश्वासघात। 6 पार्षदों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के संकेत।
Sanjay Raut warns Chandrapur Shiv Sena (UBT) corporators of strict action for joining hands with BJP.
संजय राउत और संदीर गिरहे (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Sanjay Raut Statement Chandrapur: भाजपा के साथ सत्ता में शामिल होने वाले शिवसेना (यूबीटी) के पार्षदों के खिलाफ कार्रवाई के संकेतों से यहां मनपा में सत्तासीन भाजपा के साथ ही शिवसेना (यूबीटी) के पार्षदों में दहशत देखी जा रही है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राऊत ने उनकी पार्टी के यहां के पार्षदों द्वारा भाजपा के साथ हाथ मिलाकर सत्ता में बैठने पर तीखी नाराजगी जताई है।

संजय राउत ने कहा कि चंद्रपुर के पार्षदों ने पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं को अंधेरे में रखकर भाजपा के साथ सत्ता में बैठने का निर्णय लिया। चंद्रपुर मनपा में जो कुछ हुआ उसमें उद्धव ठाकरे की कोई भूमिका नहीं है। जिस पार्टी ने उद्धव ठाकरे की पार्टी में सेंध लगाते हुए पार्टी के 2 टुकड़े किए, पार्टी का चिन्ह छीना और महाराष्ट्र की राजनीति में अराजकता पैदा की, उसी भाजपा को सत्ता के लिए मदद करने को उद्धव ठाकरे कैसे तैयार हो सकते हैं।

न तो उद्धव ठाकरे ने ऐसी कोई भूमिका ली है और न ही भविष्य में ली जाएगी। उन्होंने कहा कि चंद्रपुर में उनकी पार्टी के पार्षदों ने जो कृत्य किए हैं, उसका पार्टी का कोई भी नेता कदापि समर्थन नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में फिलहाल कुछ स्थानों पर मेयर के चुनाव चल रहे हैं, वे सब चुनाव खत्म होते ही चंद्रपुर में जिन्होंने गलत कदम उठाया है, उन्हें इसका परिणाम भुगतना ही होगा।

संदीप देशपांडे के आरोपों को नकारा

संजय राउत ने मनसे के संदीप देशपांडे के उस आरोप की भी खिल्ली उड़ाई जिसमें उन्होंने चंद्रपुर में शिवसेना (यूबीटी) के पार्षदों पर एक-एक करोड़ लेने का आरोप लगाया था। उल्लेखनीय है कि मनपा में मेयर चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) के 6 पार्षदों ने भाजपा का साथ देकर सत्ता हासिल की है। इस मनपा के आम चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत हासिल नहीं हुआ था। कुल 66 सदस्यीय इस मनपा में कांग्रेस गठबंधन के पास 30 तो भाजपा गठबंधन के पास 24 पार्षद थे।

उबाठा के पास था बारगेनिंग पावर

यहां मेयर चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए किसी भी पार्टी को शिवसेना (यूबीटी) के पार्षदों के समर्थन की जरूरत थी। इसी स्थिति का लाभ उठाते हुए शिवसेना (यूबीटी) ने बारगेनिंग पावर का इस्तेमाल करते हुए कांग्रेस तथा भाजपा से मेयर पद का आग्रह किया था, जिसे भाजपा ने स्वीकार करते हुए शिवसेना (यूबीटी) को सवा वर्ष बाद मेयर पद देने का लिखित वादा किया था।

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