चंद्रपुर महानगरपालिका (सौजन्य-नवभारत)
Chandrapur Municipal Corporation Budget News: चंद्रपुर, स्थापना के 15 वर्ष बीत जाने के बाद भी चंद्रपुर महानगर पालिका आर्थिक रूप से खस्ताहाल है। इतने वर्षों में मनपा ने आय के नए स्त्रोत नहीं तलाशे है, अब अपना खर्च चलाने के लिए मनपा को सरकारी अनुदान पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।
कुल 720 करोड़ का खर्च करने वाली इस मनपा को यह खर्च वहन करने के लिए 600 करोड़ के सरकारी अनुदान की आवश्यकता है। वर्ष 2011 से चंद्रपुर नगर परिषद का रूपांतरण महानगर पालिका में किया गया। ड़ वर्ग की मनपा इतने वर्षों में आय के नए स्त्रोत तलाशने और आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में पूर्णतः विफल रही है।
गौरतलब है कि, चंद्रपुर मनपा (Chandrapur Municipal Corporation) का सालाना बजट 750 करोड़ के करीब का है। जिनमें मनपा का खर्च ही 720 करोड़ के करीब है। इस मनपा का मुख्य आय का स्त्रोत प्रॉपर्टी टैक्स ही है, जो एक वर्ष में 45 करोड़ से अधिक का आंका गया है, किंतु यह रकम वसूलने में भी मनपा को भारी मशक्कत करनी पड़ती है, पेनाल्टी में रियायत, अन्य प्रलोभनों के साथ तमाम कोशिशों के बाद भी मनपा 70 प्रतिशत से अधिक प्रॉपर्टी टैक्स वसूल नहीं कर पाती है।
मनपा का अन्य आय का स्त्रोत भी प्रॉपर्टी टैक्स के साथ ही जुड़ा हुआ है, जिनमें 8 करोड़ का स्वच्छता कर, 12 करोड़ का उपयोगिता शुल्क तथा 6 करोड़ का पानी टैक्स का समावेश है। इस मनपा को नए कंस्ट्रक्शन को मंजूरी के तौर पर 10 करोड़, गुंठेवारी से 1 करोड़, मनपा की इमारतों में किराये के तौर पर 3 करोड़ मिलने की उम्मीद होती है। उक्त सभीं आय के स्रोतों को मिलाकर मनपा की कुल आय 100 करोड़ तक भी नहीं पहुंच पाती है।
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इस मनपा (Chandrapur Municipal Corporation) में आस्थापना पर ही करीब 105 करोड़ का खर्च होता है, जिनमें वेतन तथा अन्य भत्तों पर 55 करोड़, सेवानिवृत्ति वेतन, वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद की बकाया राशि, ग्रेच्युटी आदि पर 35 करोड़ तथा ठेका कर्मियों के मानदेय पर होने वाले 15 करोड़ के खर्च का समावेश है।
इस मनपा को आस्थापना तथा विभिन्न विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं पर होने वाला खर्च पूर्ण करने के लिए पूर्णतः जीएसटी अनुदान समेत विभिन्न सरकारी अनुदानों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। मनपा को जीएसटी अनुदान के तौर पर सरकार से 108 करोड़ तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाले अनुदान के तौर पर 515 करोड़ रुपयों की दरकार रहती है।