चंद्रपुर में सूखे का संकट गहराया, किसानों के लिए 316 करोड़ रुपए की राहत का प्रस्ताव

Chandrapur Water Crisis: चंद्रपुर जिले की सभी 15 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित हो चुकी हैं। 3.72 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र प्रभावित है। पालकमंत्री ने उद्योगों की जलापूर्ति में 10% कटौती के निर्देश दिए।
chandrapur drought crisis farmers relief water supply cut
चंद्रपुर मनपा(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Highlights:

  • कम बारिश और लंबे समय तक बारिश का खंड पड़ने से चंद्रपुर जिले की सभी 15 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित की गई हैं।

  • सूखे के कारण जिले में 3 लाख 72 हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ है।

  • पालकमंत्री डॉ. अशोक उईके ने जलसंकट से निपटने के लिए उद्योगों की जलापूर्ति में तत्काल 10 प्रतिशत कटौती के निर्देश दिए हैं।

Chandrapur Drought Situation: कम बारिश और लंबे अंतराल तक बारिश का खंड पड़ने से चंद्रपुर जिले में सूखे का संकट गहराने लगा है। इसका सबसे बड़ा असर खेती और पेयजल व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। जिले की सभी 15 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित हो चुकी हैं और 3 लाख 72 हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ है। एक ओर किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, तो दूसरी ओर आने वाले गर्मी के महीनों में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बन गया है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पालकमंत्री डॉ. अशोक उईके ने प्रशासन को अलर्ट मोड पर काम करने के निर्देश देते हुए उद्योगों की जलापूर्ति में तत्काल 10 प्रतिशत कटौती करने और पानी आपूर्ति योजनाओं के बिजली कनेक्शन काटने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।

सूखा निवारण समीक्षा बैठक

नियोजन भवन में आयोजित सूखा निवारण समीक्षा बैठक में पालकमंत्री ने स्पष्ट किया कि संकट के समय किसानों और आम नागरिकों को राहत देना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जून-जुलाई तक महानगर के नागरिकों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के लिए मनपा अभी से सूक्ष्म नियोजन करे। ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं की बिजली किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए। बिजली कनेक्शन काटने के कारण किसी गांव की जलापूर्ति ठप होने की शिकायत मिली तो संबंधितों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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जलसंकट दूर करने के लिए करने के निर्देश

उद्योगों को होने वाली जलापूर्ति में तत्काल 10 प्रतिशत कटौती लागू करने के साथ उद्योगों के सीएसआर फंड का उपयोग भी जलसंकट दूर करने के लिए करने के निर्देश दिए गए। पानी और चारे के लिए अभी से तैयारी सूखे का असर केवल खेती तक सीमित न रहे, इसके लिए प्रशासन को संभावित पेयजल संकट और पशुधन के चारे की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान देने को कहा

गया है। भूजल स्तर बढ़ाने के लिए नए जलसंधारण कार्य तत्काल शुरू किए गए हैं। पशुओं के लिए चारा शिविरों और चारे की उपलब्धता का नियोजन किया जा रहा है। कृषि पंपों के बिजली बिलों में रियायत देने तथा सूखाग्रस्त तहसीलों में कृषि पंपों की बिजली आपूर्ति खंडित नहीं करने के निर्देश भी दिए गए हैं। मजदूरों का पलायन रोकने के लिए रोजगार गारंटी योजना के तहत काम उपलब्ध कराया जा रहा है।

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किसानों के लिए 316 करोड़ का प्रस्ताव

सूखे की सबसे बड़ी मार जिले के किसानों पर पड़ी है। जिलाधिकारी वसुमना पंत ने बैठक में बताया कि जिले में 3 लाख 72 हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ है। प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए शासन के पास 316 करोड़ 95 लाख रुपए का प्रस्ताव भेजा गया है।

दिवाली के मद्देनजर किसानों को 5 हजार रुपए की अग्रिम सहायता वितरित करने का काम युद्धस्तर पर जारी है। जिले की सभी 15 तहसीलों के 56 हजार 988 किसानों को जमीन के राजस्व में छूट दी गई है। किसानों के चालू फसल कर्ज का आसान किस्तों में पुनर्गठन किया जा रहा है, जबकि खेती से संबंधित सभी कर्जी की वसूली पर जिले में स्थगन दिया गया है।