दीक्षाभूमि के लिए निर्णायक लड़ाई की तैयारी! 16 सितंबर के आक्रोश मोर्चे के बाद तय होगी आंदोलन की दिशा

Chandrapur Dikshabhoomi Morcha: चंद्रपुर दीक्षाभूमि के विकास, संरक्षण और पवित्रता की रक्षा की मांग को लेकर 16 सितंबर को आक्रोश मोर्चा निकलेगा। मोर्चे के बाद आंदोलन की अगली रणनीति तय होगी।
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चंद्रपुर दीक्षाभूमि आक्रोश मोर्चा (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Chandrapur Dikshabhoomi Development: ऐतिहासिक चंद्रपुर दीक्षाभूमि के विकास, संरक्षण और पवित्रता की रक्षा की मांग अब जोर पकड़ती जा रही है। दीक्षाभूमि प्रबंधन को लेकर बौद्ध समाज में बढ़ते असंतोष के बीच 16 सितंबर को भव्य आक्रोश मोर्चा निकाला जाएगा। इसके बाद सैकड़ों समाजबंधुओं की मौजूदगी में आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी।

चंद्रपुर दीक्षाभूमि का बौद्ध समाज के इतिहास में विशेष स्थान है। 16 अक्टूबर 1956 को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने चंद्रपुर में करीब तीन लाख अनुयायियों को बौद्ध धम्म की दीक्षा दी थी। ऐसे में इस ऐतिहासिक भूमि का विकास करते हुए उसकी ऐतिहासिक विरासत और पवित्रता अक्षुण्ण रखने की मांग की जा रही है।

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चलाया जनजागरण अभियान

दीक्षाभूमि प्रबंधन समिति के मुद्दे को लेकर पिछले कुछ वर्षों से समाज में नाराजगी है। अब शहर, तहसील और गांव स्तर पर बौद्ध युवक-युवतियों के माध्यम से जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। 16 सितंबर को दोपहर 12 बजे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा से जिलाधिकारी कार्यालय तक आक्रोश मोर्चा निकाला जाएगा।

मोर्चे के बाद बनेगी सर्वसमावेशक समिति

मोर्चे के बाद होने वाली बैठक में आंदोलन की अगली रूपरेखा के साथ आगामी धम्मचक्र प्रवर्तन दिन के कार्यक्रम की योजना बनाई जाएगी। साथ ही बौद्ध विहारों के प्रतिनिधि, आंबेडकरी आंदोलन के कार्यकर्ता, समाज के प्रतिष्ठित नागरिक और युवाओं को शामिल कर सर्वसमावेशक समिति गठित करने का निर्णय लिया जाएगा। दीक्षाभूमि मुक्ति आंदोलन की ओर से बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया है।