

Chandrapur Dikshabhoomi Protest Buddhist Followers : चंद्रपुर की ऐतिहासिक दीक्षाभूमि को लेकर बुधवार को हजारों बौद्ध अनुयायी सड़कों पर उतर आए।
दीक्षाभूमि के संरक्षण, व्यवस्थापन में समाज की भागीदारी और परिसर के राजनीतिक-व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक की मांग को लेकर जोरदार आक्रोश मोर्चा निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को मांगपत्र सौंपकर ऐतिहासिक धरोहर की मूल संरचना सुरक्षित रखने की मांग हैं।
डॉ. बाबासाहब आंबेडकर की ऐतिहासिक धम्मदीक्षा की साक्षी रही चंद्रपुर की दीक्षाभूमि के संरक्षण और व्यवस्थापन को लेकर बौद्ध-आंबेडकरी समाज ने आंदोलन का रुख अपनाया है। बुधवार को समता सैनिक दल, भारतीय बौद्ध महासभा सहित विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के सहयोग से हजारों बौद्ध अनुयायियों ने आक्रोश मोर्चा निकाला।
मोर्चा डॉ. बाबासाहब आंबेडकर की पूर्णाकृति प्रतिमा से शुरू होकर जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंचा। प्रदर्शनकारियों ने दीक्षाभूमि व्यवस्थापन समिति में बौद्ध-आंबेडकरी समाज के प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग की। उनका कहना है कि व्यवस्थापन समिति में समाज के विभिन्न प्रतिनिधियों के साथ सभी बौद्ध विहार मंडलों के अध्यक्षों को भी स्थान दिया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने चंद्रपुर की दीक्षाभूमि के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। 16 अक्टूबर 1956 को डॉ. बाबासाहब आंबेडकर ने बैरिस्टर राजाभाऊ खोब्रागड़े के आग्रह पर चंद्रपुर में बड़ी संख्या में शोषित और पीड़ित समाज के लोगों को बौद्ध धम्म की दीक्षा दी थी। इस ऐतिहासिक घटना के कारण चंद्रपुर को बौद्ध संस्कृति के इतिहास में विशेष स्थान प्राप्त हुआ।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि दीक्षाभूमि के व्यवस्थापन में एक ही परिवार के रक्त संबंधियों के बजाय व्यापक बौद्ध-आंबेडकरी समाज के प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
प्रदर्शनकारियों ने 15 और 16 अक्टूबर को होने वाले धम्मचक्र प्रवर्तन दिन कार्यक्रमों को अनुमति देने, दीक्षाभूमि के व्यावसायिक और राजनीतिक इस्तेमाल पर रोक लगाने तथा परिसर में अनावश्यक स्टॉल नहीं लगाने की मांग की।
इसके अलावा शासन की निधि से चंद्रपुर दीक्षाभूमि के विकास कार्य पूरे करने और विकास के नाम पर ऐतिहासिक विहार तथा मूल संरचना को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाने की मांग भी ज्ञापन में की गई।
मोर्चे के बाद प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को मांगपत्र सौंपा। जिलाधिकारी ने जल्द बैठक आयोजित कर मांगों पर चर्चा करने और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। आंदोलन में प्रतीक डोलिकर, एड. राजस खोब्रागड़े, लुंबिनी गणवीर, एड. प्रियंका चव्हाण, हर्षल खोब्रागड़े, करण सोमकुवर सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और नागरिक उपस्थित रहे।