धानोरा फाटा पर 4 घंटे तक चक्काजाम, मृतक के परिवार को 10 लाख और घायल को 1 लाख का मुआवजा मंजूर

Road Accident: चंद्रपुर के धानोरा फाटा पर हुए दर्दनाक हादसे के बाद जनाक्रोश भड़क उठा। 20 घंटे तक मुआवजे पर चुप्पी साधने वाली कंपनी को चक्काजाम के सामने झुकना पड़ा। परिजनों को 10 लाख रुपये देने पर सहमत
A four-hour road blockade was staged at Dhanora Phata; compensation of ₹10 lakh was approved for the deceased's family and 10 lakh for the injured
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Chandrapur Today, Road Accident : चंद्रपुर शहर के समीपवर्ती धानोरा फाटा क्षेत्र में एक तेज रफ्तार टैंकर की लापरवाही ने न केवल एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां उजाड़ दीं, बल्कि पूरे इलाके में भारी जनाक्रोश पैदा कर दिया।

लापरवाही से वाहन चलाने वाले टैंकर चालक ने एक कार को टक्कर मारी और अनियंत्रित होकर एक सैलून व होटल में जा घुसा। इस भीषण हादसे के बाद हुए बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन के कारण प्रशासन और संबंधित कंपनी को अंततः झुकना पड़ा।

हादसे में सैलून संचालक की मौत और कई घायल

हादसा उस समय हुआ जब एक अनियंत्रित टैंकर ने धानोरा फाटा पर खड़ी एक कार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि टैंकर सड़क किनारे स्थित एक सैलून और उससे सटे होटल में घुस गया। इस दुखद घटना में सैलून संचालक शंकर जुनारकर (34) की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसे में होटल संचालक, एक कर्मचारी और कार सवार यात्री भी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

कंपनी की चुप्पी और भड़का जनभावना का ज्वार

घटना के 20 घंटे बीत जाने के बावजूद ए.आर.एस. (ARS) टैंकर चालक कंपनी के अधिकारियों ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई। पुलिस थाने में हुई शुरुआती वार्ता विफल रहने के बाद स्थानीय नागरिकों और सभी राजनीतिक दलों का गुस्सा फूट पड़ा। कांग्रेस अध्यक्ष राजुरेड्डी, तालुकाध्यक्ष अनिल नरुले, भाजपा अध्यक्ष संजय तिवारी, शिवसेना (UBT) के चेतन बोबडे और अन्य स्थानीय नेताओं के नेतृत्व में धानोरा फाटा पर मोर्चा खोल दिया गया।

4 घंटे तक थमी रही सड़कों की रफ्तार

गुरुवार को हुए इस चक्काजाम के कारण पडोली से गडचांदूर मार्ग पर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। सर्वदलीय नेताओं और नगर परिषद कर्मचारियों के इस आंदोलन ने चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि जब तक मृतक के परिवार को उचित आर्थिक सहायता और घायलों को मदद नहीं मिलती, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस निरीक्षक प्रकाश राऊत ने दंगा नियंत्रण पथक (RCP) और भारी पुलिस बल तैनात किया।

आंदोलन स्थल पर ही हुआ मुआवजे का समझौता

तनावपूर्ण स्थिति के बीच कंपनी के अधिकारियों को आंदोलन स्थल पर बुलाया गया। लंबी चर्चा के बाद सर्वदलीय नेताओं के दबाव में कंपनी ने मृतक शंकर जुनारकर के परिजनों को 10 लाख रुपये और गंभीर रूप से झुलसे घायल युवक को 1 लाख रुपये का मुआवजा देने पर लिखित सहमति जताई।

मुआवजा राशि मंजूर होने के बाद नेताओं ने चक्काजाम वापस लिया और यातायात बहाल हो सका। इस दौरान घुग्घूस शहर के विभिन्न संगठनों और ग्रामीणों ने एकजुटता दिखाकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया।

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