

Highlights:
चिमूर तहसील में आतंक फैलाने वाले 'त्रिशूल' नामक बाघ को वन विभाग ने 3 नवंबर को जेरबंद किया।
बाघ ने 23 अप्रैल को शंकर मसराम, 6 जुलाई को राजेंद्र भोयर और 30 अक्टूबर को सदाशिव चिरकुटा पर हमला किया था।
गदगांव के उरकुड़पार स्थित संरक्षित वन कक्ष क्रमांक 380 में वन विभाग, पशु चिकित्सकों, आरआरटी टीम और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की।
Chandrapur Forest Department: चंद्रपुर जिले के चिमूर तहसील में तीन किसानों की जान लेकर पूरे इलाके में दहशत फैलाने वाले 'त्रिशूल' नामक बाघ को आखिरकार वन विभाग ने मंगलवार (3 नवंबर) को जेरबंद कर लिया। गदगांव क्षेत्र के उरकुड़पार स्थित संरक्षित वन कक्ष क्रमांक 380 में वन विभाग की विशेष टीम ने यह कार्रवाई की। पशु चिकित्सक, वनकर्मियों, आरआरटी टीम और पुलिस के संयुक्त अभियान में बाघ को बेहोश कर सुरक्षित पकड़ा गया। इस कार्रवाई से लंबे समय से दहशत के साये में जी रहे किसानों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
इस बाघ ने सबसे पहले 23 अप्रैल 2026 को वाहनगांव के किसान शंकर मसराम पर हमला किया था। इसके बाद 6 जुलाई को नवेगांव पुनर्वसन के राजेंद्र भोयर की बाघ के हमले में मौत हो गई थी। हाल ही में 30 अक्टूबर को गरडापार के किसान सदाशिव चिरकुटा (50) को इसी बाघ ने संरक्षित वन कक्ष में अपना शिकार बनाया। लगातार तीन किसानों की मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश और भय का माहौल था। बाघ को पकड़ने की मांग भी तेज हो गई थी।
यह अभियान उपवनसंरक्षक डॉ. कुमारस्वामी एस.आर. और सहायक वनसंरक्षक डॉ. महेश गायकवाड़ के मार्गदर्शन में पूरा हुआ। वनपरिक्षेत्र अधिकारी किशोर देवरकर के साथ वन विभाग के कर्मचारियों, ताडोबा-अंधारी बाघ परियोजना की आरआरटी टीम और पुलिसकर्मियों ने अभियान में सहभागिता की।
विशेष अभियान चलाकर किया बेहोश पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. रविकांत खोब्रागडे और पुलिस हवलदार अजय मराठे ने बाघ को बेहोश कर सुरक्षित रूप से पकड़ने में अहम भूमिका निभाई। लगभग पांच वर्ष आयु के इस बाघ को आगे के उपचार और निगरानी के लिए ब्रह्मपुरी स्थित ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर (टीटीसी) में स्थानांतरित किया गया है।
उधर एक घटना में बाबूपेठ-जुनोना मार्ग पर अज्ञात वाहन की टक्कर से एक पाम सिवेट (मसण्याउद) की दर्दनाक मौत हो गई। जंगल की ओर जा रहे हैबिटेट कंजर्वेशन सोसायटी के सदस्य यश सोनुले और कल्पित सोरटे को यह वन्यप्राणी सड़क पर गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला। उसके मुंह और पेट पर वाहन का पहिया गुजरने से गंभीर चोटें आई थीं और मुंह से काफी खून बह रहा था।
घायल वन्यप्राणी सड़क पर तड़प रहा था। सोसाइटी के सदस्यों ने तत्काल उसे उपचार के लिए ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर (टीटीसी) पहुंचाने के लिए वाहन की व्यवस्था करने का प्रयास किया, लेकिन मदद पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। घटना की जानकारी वन विकास महामंडल (एफडीसीएम) को दी गई है। हैबिटेट कंजर्वेशन सोसाइटी के अध्यक्ष दिनेश खाटे ने बताया कि संस्था पिछले कई वर्षों से चंद्रपुर जिले में वन्यजीव हादसों में जान गंवा चुके है।