

Chandrapur Ashram School Student Haircut: चंद्रपुर ज़िले के चिमूर तहसील के जांभूलघाट स्थित शासकीय माध्यमिक आश्रमशाला में करीब 80 विद्यार्थियों के आधे सिर के बाल काटे जाने का मामला सामने आया है। अभिभावकों ने अधीक्षक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। मामले में अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
चंद्रपुर ज़िले के चिमूर तहसील के ग्राम जांभूलघाट स्थित शासकीय माध्यमिक आश्रमशाला में विद्यार्थियों के बाल काटे जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि आश्रमशाला में करीब 80 विद्यार्थियों के आधे सिर के बाल मुंडे गए। घटना की जानकारी सामने आने के बाद अभिभावकों में नाराजगी है और आश्रमशाला के अधीक्षक प्रशांत आत्राम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
अभिभावकों का कहना है कि आश्रमशाला में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिलना चाहिए। ऐसे में विद्यार्थियों के बाल काटने से पहले उनकी या अभिभावकों की अनुमति ली गई थी या नहीं, यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
चोरविहीरा निवासी अभिभावक गजानन चौधरी ने आरोप लगाया कि अधीक्षक ने शराब के नशे में उनके बेटे के बाल आधे काट दिए, जिससे उसका चेहरा विद्रूप हो गया। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए संबंधित अधीक्षक के तत्काल निलंबन की मांग की है।
हालांकि, अधीक्षक के शराब के नशे में होने संबंधी आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इस दावे की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
एक अन्य अभिभावक किसन इरपाते ने बताया कि बेटे का फोन आने के बाद वे आश्रमशाला पहुंचे और मामले की जानकारी ली। उनके अनुसार, पहले विद्यार्थी का आधा सिर मुंडा गया और बाद में रात में उसका पूरा सिर मुंडे जाने की बात सामने आई। उन्होंने भी संबंधित अधीक्षक के निलंबन की मांग की।
आश्रमशाला के मुख्याध्यापक प्रशांत गिरी ने बताया कि वे एक महत्वपूर्ण काम के सिलसिले में करीब एक घंटे के लिए चिमूर गए थे। वापस लौटने के बाद विद्यार्थियों ने उन्हें घटना की जानकारी दी।
जानकारी मिलते ही उन्होंने संबंधित अधीक्षक प्रशांत आत्राम को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अब मामले में अधीक्षक से घटना को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
घटना के बाद अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। यह पता लगाना जरूरी है कि विद्यार्थियों के बाल काटने का वास्तविक कारण क्या था, यह कार्रवाई किसके निर्देश पर की गई और क्या इसके लिए विद्यार्थियों या उनके अभिभावकों की अनुमति ली गई थी।
साथ ही उस समय अधीक्षक की स्थिति क्या थी और विद्यार्थियों के साथ वास्तव में क्या हुआ, इसकी भी जांच आवश्यक है। अभिभावकों के आरोप, मुख्याध्यापक की प्रारंभिक कार्रवाई और संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
आश्रमशाला में कुल 572 विद्यार्थियों की सुरक्षा और देखरेख को लेकर भी सवाल उठे हैं। अभिभावकों की मांग है कि निष्पक्ष जांच कर विद्यार्थियों का पक्ष सुना जाए और आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।