सर्वे का दिखावा बंद करो, सीधे खाते में दो मुआवजा! अकोला में राजस्व मंत्री बावनकुले के सामने किसान का बड़ा ऐलान

Akola Farmer Crop Loss Insurance:अकोला में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के सामने किसानों ने सूखा राहत का फार्मूला रखा। प्रति एकड़ सहायता तय करने और फसल बीमा का मुआवजा सीधे देने की मांग की।
Akola Drought Farmer Relief
अकोला में चंद्रशेखर बावनकुले के सामने किसानों ने सूखा राहत का फार्मूला रखासोर्स: सोशल मीडिया
Published on: 
Updated on: 

Akola Drought Farmer Relief: अकोला जिले के दौरे पर पहुंचे राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के सामने किसानों ने सूखा राहत को लेकर सीधा फार्मूला रखा। किसान आनंद सोनटक्के ने फसल बीमा का मुआवजा तत्काल दिलाने और प्रति एकड़ तय आधार पर सूखा सहायता देने की मांग की।

सर्वे नहीं, सीधे खातों में मिले राहत

अकोला, सूखे की मार झेल रहे किसानों को तत्काल आर्थिक राहत देने की मांग को लेकर अकोला जिले में किसानों ने सरकार के सामने व्यावहारिक फार्मूला रखा है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के जिले के दौरे के दौरान बालापुर तहसील के देगांव के प्रगतिशील किसान और अकोला जिला कांग्रेस कमेटी के सचिव आनंद सोनटक्के ने किसानों की समस्याएं उनके सामने रखीं।

सोनटक्के ने कहा कि किसानों ने अपनी जेब से फसल बीमा की राशि भरी है। ऐसे में राहत के लिए बार-बार फसल निरीक्षण, सर्वेक्षण और प्रशासनिक दौरों की प्रक्रिया में समय लगाने के बजाय सरकार को संबंधित बीमा कंपनियों को तत्काल निर्देश देकर मुआवजे की राशि किसानों के बैंक खातों में जमा कराने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।

Akola Drought Farmer Relief
MPSC अभ्यर्थियों के आंदोलन पर शरद पवार की सरकार से अपील, कहा- छात्रों से तत्काल बातचीत करें

प्रति एकड़ तय हो सूखा राहत

सोनटक्के ने सोयाबीन खरीद व्यवस्था का उदाहरण देते हुए सरकार के सामने दूसरा सुझाव रखा। उन्होंने कहा कि सरकारी फेडरेशन जब सोयाबीन की खरीद करता है तो प्रति एकड़ कितने क्विंटल तक उत्पादन की सीमा मानी जाएगी, इसका आधार तय किया जाता है।

इसी तरह सरकार प्रति एकड़ सूखा सहायता की राशि भी पहले से निर्धारित कर सकती है। उनके अनुसार, इससे प्रत्येक खेत के लिए अलग-अलग निरीक्षण, जांच और सर्वेक्षण जैसी प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम हो सकती है और प्रभावित किसानों तक आर्थिक सहायता तेजी से पहुंचाई जा सकती है।

किसानों ने भी किया सुझाव का समर्थन

सोनटक्के के इस सुझाव को मौके पर मौजूद किसानों का समर्थन मिलने की बात कही गई। किसानों ने मांग की कि राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करें और प्रशासन को आवश्यक निर्देश दें।

किसानों का कहना है कि सूखे की स्थिति में राहत राशि मिलने में देरी होने से उनकी आर्थिक परेशानी और बढ़ जाती है। फसल खराब होने के बाद अगली खेती की तैयारी, कृषि सामग्री और घरेलू खर्च के लिए भी किसानों को तत्काल पैसों की जरूरत होती है।

Akola Drought Farmer Relief
ATM खाली, VIP दर्शन बंद! नासिक के त्र्यंबकेश्वर में बढ़ा कैश संकट, दुकानदारों का ऑनलाइन पेमेंट से इनकार

फसल बीमा का मुआवजा जल्द देने की मांग

सोनटक्के ने कहा कि राज्य सरकार ने 265 तहसीलों में सूखा घोषित किया है, लेकिन सूखे की वास्तविक मार किसान झेल रहा है। ऐसे में केवल कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बजाय किसानों को जल्द आर्थिक सहायता देना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि जब किसानों ने पहले ही फसल बीमा का प्रीमियम भरा है, तो सरकार को बीमा कंपनियों के साथ समन्वय कर पात्र किसानों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया तेज करनी चाहिए। इससे किसानों को राहत के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

उन्होंने सरकार से मांग की कि फसल निरीक्षण और सर्वेक्षण की प्रक्रिया के साथ-साथ सीधी आर्थिक सहायता पहुंचाने पर भी प्राथमिकता दी जाए, ताकि सूखे से प्रभावित किसानों को समय पर राहत मिल सके।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com