BJP-UBT गठबंधन को उद्धव ठाकरे की हरी झंडी, उध्दव की दोहरी चेतावनी, कहा-BJP का विरोध भी करें

Chandrapur Politics: चंद्रपुर मनपा में बीजेपी-शिवसेना (यूबीटी) गठबंधन को उद्धव ठाकरे की हरी झंडी, सवा साल महापौर पद साझा करने पर बनी सहमति।
Chandrapur Municipal Corporation
Uddhav Thackeray decision (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Chandrapur Municipal Corporation: बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों के नेताओं ने ‘महापौर’ पद के लिए पार्टी में शामिल होने का खुला ऑफर दिया था, लेकिन शिवसेना (यूबीटी) ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। पार्टी का कहना था कि चंद्रपुर जिले में संगठन को जीवित रखना और उसे मजबूत करना उनका मुख्य उद्देश्य है।

यह जानकारी शिवसेना (यूबीटी) के जिला प्रमुख संदीप गिर्हे ने मंगलवार, 24 फरवरी को मुंबई स्थित ‘मातोश्री’ में हुई बैठक में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे को दी। इस दौरान चंद्रनपुर नगर निगम में बीजेपी को समर्थन देने के फैसले की पृष्ठभूमि भी समझाई गई।

BJP-UBT गठबंधन को मिली हरी झंडी

बताया गया कि बीजेपी ने यूबीटी का सम्मान करते हुए सवा साल तक महापौर पद देने पर सहमति जताई है। इसी आधार पर सत्ता स्थापना में समर्थन देने का निर्णय लिया गया। इस पर उद्धव ठाकरे ने हरी झंडी दिखाई, लेकिन साथ ही सावधान रहने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर पार्टी का अस्तित्व बनाए रखें और जहां आवश्यक हो, वहां बीजेपी का विरोध भी करें। ठाकरे ने चेताया कि बीजेपी नेता काफी चतुर हैं, इसलिए संगठन को मजबूत रखना जरूरी है।

ठाकरे के बुलावे पर मुंबई पहुंचे नगरसेवक

महापौर चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) और बीजेपी के बीच गठबंधन की खबर से मुंबई से लेकर चंद्रपुर तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी। इस पर शिवसेना नेता सुषमा अंधारे ने गिर्हे का समर्थन किया था। इस बीच मनसे प्रवक्ता संदीप देशपांडे ने गंभीर आरोप लगाया कि बीजेपी ने इस गठबंधन के लिए चंद्रपुर में छह शिवसेना नगरसेवकों को एक-एक करोड़ रुपये और निर्दलीय नगरसेवकों को 50 लाख रुपये दिए। इन आरोपों का जिला प्रमुख संदीप गिर्हे ने खंडन किया। विवाद बढ़ने पर शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने सभी छह शिवसेना नगरसेवकों को मुंबई बुलाया। उनके निर्देश पर छह शिवसेना और दो निर्दलीय नगरसेवक सोमवार को मुंबई रवाना हुए और मंगलवार को ‘मातोश्री’ में उद्धव ठाकरे से मुलाकात की।

कांग्रेस नेताओं से बेइज्जती का आरोप

बैठक में शिवसेना के छह नगरसेवकों के साथ जिला प्रमुख संदीप गिर्हे, उपमहापौर प्रशांत दानव, मनस्वी गिर्हे, आकाश साखरकर, पार्षद लांडगे, गुटनेता राहुल विरुटकर, श्रुति घाटे और निर्दलीय नगरसेवक नंदू नागरकर मौजूद थे। मातोश्री में हुई चर्चा के दौरान गिर्हे ने चंद्रपुर मनपा की राजनीतिक स्थिति और सत्ता संतुलन की जानकारी दी। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव से पहले और बाद में कांग्रेस के स्थानीय नेताओं की ओर से उन्हें अपमानित किया गया।

पार्टी के विकास के लिए लिया गठबंधन का फैसला

बैठक से यह संकेत मिला कि उद्धव ठाकरे ने एक तरह से बीजेपी-शिवसेना (यूबीटी) गठबंधन को मौन सहमति दे दी है। आने वाले विषय समिति चुनावों में यूबीटी के सम्मान का मुद्दा स्पष्ट होने की संभावना है। कांग्रेस के खिलाफ मातोश्री में हुई चर्चा के बाद स्थानीय राजनीति और गर्माने के आसार हैं, हालांकि इस पर कांग्रेस नेताओं की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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दोनों दलों से मिला था पार्टी प्रवेश का ऑफर

कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों ने शिवसेना नगरसेवकों को महापौर पद के लिए पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, यूबीटी नेताओं ने यह ऑफर इसलिए ठुकराया क्योंकि वे स्थानीय स्तर पर पार्टी का अस्तित्व बनाए रखना चाहते थे।

गिर्हे ने ठाकरे को बताया कि सवा साल के लिए महापौर पद साझा करने पर सहमति बनी है और इसके लिए 500 रुपये के स्टांप पेपर पर समझौता भी किया गया है। उद्धव ठाकरे ने उन्हें सलाह दी कि जनता के विकास के लिए सत्ता में रहना गलत नहीं है, लेकिन पार्टी का वजूद बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। साथ ही उन्होंने मनपा में जरूरत पड़ने पर बीजेपी के खिलाफ सख्त रुख बनाए रखने को कहा।

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