Chandrapur District: चंद्रपुर जिले में स्थित लगभग 2 मिलियन साल पुराना भटाला प्रागैतिहासिक विरासत स्थल वर्तमान में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. नागपुर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की चेतावनी के अनुसार इस स्थल के पास हो रहे अवैध खनन और प्रशासनिक अनदेखी के कारण भारत के मानव इतिहास के अत्यंत महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट होने की कगार पर हैं.
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए याचिका दायर की है. याचिका पर सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत मित्र अधि. भानुदास कुलकर्णी ने कहा कि कुछ विशेषज्ञों के साथ ऐतिहासिक स्थल का जल्द ही मुआयना किया जाएगा. इसके बाद अदालत में रिपोर्ट सौंपी जाएगी. इसके बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने सुनवाई स्थगित कर दी.
शोधकर्ताओं ने भटाला स्थल की तुलना चंद्रपुर की प्रसिद्ध पापामिया पहाड़ी से की है जो भारत के सबसे पुराने पाषाणयुगीन स्थलों में से एक मानी जाती है. जिस तरह शहरीकरण ने पापामिया पहाड़ी को नुकसान पहुंचाया, वैसा ही खतरा अब भटाला पर मंडरा रहा है. यहां पाए जाने वाले लाल क्वार्टजाइट कलाकृतियां, हाथ की कुल्हाड़ियां और आदिम पत्थर के औजार खनन के धमाकों के कारण नष्ट हो सकते हैं.
पुरातत्व विभाग के अनुसार भटाला स्थित भवानी मंदिर एक संरक्षित स्मारक है. प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम 2010 के तहत ऐसे संरक्षित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के खनन या विस्फोट पर पूर्ण प्रतिबंध है. शोधकर्ताओं का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर मंदिर के 300 मीटर के दायरे में बड़े पैमाने पर विस्फोट और खनन जारी है. यहां तक कि जनता को जागरूक करने के लिए लगाए गए वैधानिक सूचना बोर्ड भी स्थल से हटा दिए गए हैं जो प्रशासन की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है.