जागृत है ब्रम्हपुरी का श्री जगदंबा माता भवानी देवस्थान, माता के कई रुपों की होती है पूजा
Chandrapur News: ब्रम्हपुरी, चंद्रपुर की एक सांस्कृतिक नगरी है जहाँ सभी धर्मों के त्योहार भाईचारे से मनाए जाते हैं। विशेषकर नवरात्रि में भवानी माता के जागृत मंदिर का महत्व बढ़ जाता है।
- Written By: आकाश मसने
ब्रम्हपुरी का श्री जगदंबा माता भवानी मंदिर (फोटो नवभारत)
Chandrapur Navratri News: चंद्रपुर जिले के ब्रम्हपुरी शहर की एक शैक्षणिक, सांस्कृतिक तथा धार्मिक नगरी के रूप में पहचान है। यहां सभी धर्म,सभी पंथ के धार्मिक कार्यक्रम बडे हर्षोल्लास के साथ भाईचारे से मनाए जाते हैं। विशेष रूप से नवरात्रि उत्सव से यहां का वातावरण ही बदल जाता है। माता के कई रुप हैं दुर्गा, काली, अंबिका, एकविरा, भवानी के रूप में इनकी पूजा होती है।
हर व्यक्ति को किसी न किसी रूप के प्रति आस्था होती है। ब्रम्हपुरी शहर के निर्माण समय से ही यहां भवानी माता का वास माना जाता है। माता के प्रति ब्रम्हपुरी की जनता की अगाध आस्था है, यह एक जागृत देवस्थान हैं, और प्राचीन काल से सभी का श्रद्धास्थान रहा है, लोग हररोज भक्ति भाव से पूजा अर्चना करते हैं।
दान से हुआ भवय मंदिर का निर्माण
भक्तों की श्रद्धा के कारण दानी लोगों की दानशूरता के कारण भव्य मंदिर निर्माण हुआ। मंदिर की देखभाल और कार्यक्रमों का नियोजन कमेटी द्वारा किया जा रहा है। इस कमेटी में मनोहर कावले ,अध्यक्ष, राकेश पडोले और स्वप्निल अलगदेवे उपाध्यक्ष, सुधीर पडोले सचिव,रोशन कावले सहसचिव, और दामोदर आंबोरकर सहसचिव साथ में कुछ सदस्य भी हैं।
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माता के मंदिर में होने वाले प्रमुख कार्यक्रमों में शारदीय नवरात्रि में और चैत्र नवरात्रि में यहां उत्साह के साथ नवरात्रि उत्सव मनाया जाता जिसमें भवानी वार्ड तथा पूरे ब्रम्हपुरी के नागरिक पूर्ण श्रद्धा के साथ सहभाग लेते हैं।
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340 कलश स्थापित किए
रविवार 22 सितंबर 2025 को घटस्थापना के दिन सुबह 12 बजे मंदिर में मुख्य कलश की स्थापना हुई साथ साथ भक्तों के निजी कलशों को भी स्थापित किए कुल 340 कलश स्थापित हुए जो नवमी तक बढ़ने की संभावना है क्योंकि किसी का 9 दिन का, किसी का 5 दिन का तो किसी का 3 दिन का घट रखते हैं।
नवमी पर नवकन्या पूजन कार्यक्रम रहता है और रात में सभी घटो का विसर्जन किया जाता नवरात्रि में भक्तों द्वारा 9 दिन का,तो कोही 5 दिन का तो कहीं एक दिन का उपवास रखते हैं।पर सभी के उपवास नवमी को पुर्ण होता है। दशहरे के बाद देवस्थान और दानी लोगों की मदद से भव्य महाप्रसाद का आयोजन होता है जो सभी लोग बड़ी आस्था के साथ ग्रहण करते हैं।
