चंद्रपुर में मिडनाइट ड्रामा! अनशन के छठे दिन बंडू धोतरे को पुलिस ने जबरन उठाया, अस्पताल में भी सत्याग्रह जारी
Bandu Dhotre Hunger Strike Chandrapur: चंद्रपुर में बवाल! अनशनकारी बंडू धोतरे को पुलिस ने मध्यरात्रि में जबरन अस्पताल में किया भर्ती। अस्पताल में भी अन्नत्याग जारी। महिलाओं का 'थाली बजाओ' आंदोलन।
- Written By: प्रिया जैस
महिलाओं का थाली बजाओ आंदोलन (सौजन्य-नवभारत)
Eco-Pro President Protest: चंद्रपुर जिले में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष की घटनाओं में हो रही वृद्धि तथा इसमें बेकसूर लोगों की हो रही मौत पर उपाययोजना की मांग पर अनशन कर रहे आंदोलनकारी बंडू धोतरे को मध्यरात्रि में पुलिस मंडप से उठाकर ले गई तथा उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया। अनशनकारी धोतरे के आंदोलन का मंगलवार को छठा दिन था।
वे जिलाधिकारी कार्यालय के सामने लगाए गए पंडाल में मध्यरात्रि को सोए हुए थे कि, अचानक पुलिस अधिकारी अपने कर्मियों के साथ वहां आ पहुंचे और उन्हें जबरन उठाकर एम्बुलेंस में डालते हुए अस्पताल ले गए। गौरतलब है कि, अस्पताल में दाखिल किए जाने के बाद धोतरे ने डॉक्टरों की सलाह पर उपचार तो शुरू किया लेकिन वहां भी उन्होंने अपना अन्नत्याग सत्याग्रह जारी रखा।
जिले में बढ़ते मानव-वन्यजीवों के बीच संघर्ष, बाघ के हमलों से होने वाली मौतों और ताड़ोबा के ज़रूरी वाइल्डलाइफ़ कॉरिडोर के लिए खतरा बने ‘लोहारडोंगरी’ माइनिंग प्रोजेक्ट के ख़िलाफ़ पर्यावरणीय संगठन इको-प्रो के अध्यक्ष धोतरे ने यह आंदोलन छेड़ा है। अन्नत्याग सत्याग्रह का यह आंदोलन मंगलवार को छठे दिन भी जारी रहा।
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जबरन किया भर्ती : धोतरे
अनशनकारी धोतरे ने आरोप लगाया कि, उनकी सेहत बिल्कुल ठीक होने के बावजूद पुलिस जबरन उन्हें रात के अंधेरे में उठाकर ले गई तथा अस्पताल में भर्ती कर दिया। उन्होंने बताया कि, डॉक्टरों की शुरुआती जांच के बाद, उन्होंने अस्पताल में भर्ती होने से लिखित रूप में इनकार किया था।
बावजूद इसके पुलिस ने उन्हें जबरन उठाकर एम्बुलेंस में डाला और शांतिपूर्ण ढंग से चल रहे उनके आंदोलन को तनावपूर्ण स्थिति में बदल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि, जब तक सरकार की ओर से उनकी मांगे पूर्ण नहीं की जाती, उनका अन्नत्याग सत्याग्रह जारी रहेगा।
महिलाओं ने किया थाली बजाओ आंदोलन
इस बीच मंगलवार को धोतरे के भूख हड़ताल मंडप के सामने कई महिलाएं इकट्ठा हुईं और उन्होंने मानव श्रृंखला बनाते हुए मूक थाली बजाओ आंदोलन किया। इस आंदोलन में कई संगठनों की महिलाओं ने हिस्सा लिया।
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जिनमें मुख्य रूप से जिजाऊ ब्रिगेड, महिला कांग्रेस कमेटी, इको प्रो संगठन, बाबूपेठ में कई महिला सेल्फ-हेल्प ग्रुप, राधाकृष्ण योग ग्रुप और ख्वातीन-ए-इस्लाम महिला संगठन की ओर से अर्चना चौधरी, चंदा वैरागड़े, संजीवनी वासेकर, वैशाली चलखुरे, आशा दूधपचारे, जयश्री वाघधरे, अर्चना मंदाडे, सुचिता बंगपंडू, वैशाली तुमराम, लता होरे, जोत्सना उरकुडे, आरती येरगुडे, सादमा कुरेकर, प्रतिमा पारकेरे, मीनाक्षी धुमाने, सुरेखा गौरकर, ज्योति खामनकर, संध्या कुरेकार, सविता चटप, वंदना पवार, कविता बावने, लता जाजुलवार, रजनी मडावी, वनिता दयालवार, कंचन मोहुर्ले, सुनीता ठाकरे, प्रिया भूरे, माधुरी फले, मनीषा डोलस्कर, वैशाली भागवत, मनीषा कोहपारे, वैशाली कोडापे, नेहा शास्त्रीकर, मोना बुरडकर, रूपाली मुल्लेवार, विशाखा लिपटे, आशा दूधपचारे जयश्री वाघधरे आदि का समावेश था।
