जिस बेटी के खून के इल्जाम में पिता-भाई थे जेल में, अचानक वह मृत लड़की पुलिस थाने पहुँची, जानें पूरा मामला
Dead Girl Reaches Police Station: हत्या के आरोप में निर्दोष पिता और भाई जेल की सलाखों के पीछे, जबकि मृत घोषित लड़की अचानक जीवित पुलिस थाने पहुंच गई। जानें पुलिस की इस अंधा कानून जांच की पूरी सच्चाई।
- Written By: गोरक्ष पोफली
सांकेतिक फोटो (सोर्स: एआई फोटो)
Girl Found Alive After Murder Case: महाराष्ट्र के बुलढाना से एक ऐसी सनसनीखेज दास्तां सामने आई है, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। यह कहानी किसी बॉलीवुड थ्रिलर फिल्म जैसी लगती है, जहाँ पुलिस की एक भयानक चूक ने दो बेगुनाहों को जेल की कालकोठरी में धकेल दिया, और जिस लाश का मातम मनाया जा रहा था, वह खुद चलकर थाने पहुंच गई।
राजुरा बांध का वो खौफनाक मंजर
बात अप्रैल महीने की है, जब मध्य प्रदेश के बुरहानपुर से शिवानी कलमेकर नाम की लड़की रहस्यमयी ढंग से लापता हो गई। परिवार उसे दर-दर ढूंढ रहा था, तभी मई के पहले हफ्ते में महाराष्ट्र के जलगांव जामोद इलाके के राजुरा बांध के पास एक ऐसी लाश मिली जिसे देख कलेजा कांप जाए। लाश का सिर कटा हुआ था और पहचान मिटाने के लिए उसे बेरहमी से जलाया गया था।
पुलिस की जल्दबाजी और अंधा कानून
हैरत की बात यह रही कि जलगांव जामोद पुलिस ने बिना किसी DNA टेस्ट या फॉरेंसिक सबूत के, सिर्फ अंदाजे पर यह मान लिया कि वह लाश शिवानी की ही है। कानून के रखवालों ने अपनी तफ्तीश की सुई सीधे शिवानी के पिता और सगे भाई पर टिका दी। उन पर अपनी ही बेटी और बहन की हत्या का कलंक मढ़ दिया गया और उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया गया। जेल की उन अंधेरी दीवारों के पीछे बेगुनाह बाप-बेटे अपनी बेगुनाही के आंसू बहा रहे थे, जबकि बाहर पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही थी कि उन्होंने मर्डर मिस्ट्री सुलझा ली है।
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जब मुर्दा लौट आया जिंदा
पुलिस की फाइलें बंद हो चुकी थीं, पर असलियत अभी बाकी थी। अचानक एक दिन जलगांव जामोद पुलिस स्टेशन के दरवाजे खुले और सामने खड़ी लड़की को देख पुलिस वालों के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह शिवानी थी! जिसे पुलिस अपनी फाइलों में मृत घोषित कर चुकी थी, वह साक्षात उनके सामने खड़ी थी।
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खाकी पर सवाल और उलझी गुत्थी
शिवानी के जिंदा लौट आने से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर शिवानी जिंदा है, तो वह सिर कटी लाश किसकी थी? पुलिस की इस घोर लापरवाही ने न केवल एक परिवार को बर्बाद करने की कोशिश की, बल्कि असली कातिल को भी खुलेआम घूमने का मौका दे दिया। आज बेगुनाह पिता और भाई के हक में न्याय की मांग उठ रही है और खाकी की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लग गया है।
