'किडनी ले लो पर कर्ज माफ करो', बुलढाणा के किसानों की सरकार से गुहार, सड़क पर उतरे अन्नदाता, देखें वीडियो

Buldhana Farmers Protest: महाराष्ट्र के बुलढाणा में किसानों का अनोखा प्रदर्शन! कर्ज से परेशान किसान ने किडनी बेचने की पेशकश की। फटे कपड़े पहनकर जताया विरोध, उठाई पूर्ण कर्ज माफी की मांग।
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विरोध की फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Farmers Offer Kidney For Loan Waiver: महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने राज्य के कृषि संकट और किसानों की बदहाली को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की बेबसी ने पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

किडनी बेचने की पेशकश और किसानों का प्रदर्शन

बुलढाणा जिले की मोताला तहसील के आव्हा गांव के 35 वर्षीय किसान शुभम घोंगटे ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा है कि उनके पास अब आत्महत्या करने या अपनी किडनी बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। हाल ही में, क्षेत्र के किसान फटे कपड़े पहनकर और गले में अपनी मांगों के पोस्टर लटकाकर सड़क पर उतरे और तहसीलदार को ज्ञापन सौपा। इन किसानों की मांग है कि यदि सरकार उनका कर्ज माफ नहीं कर सकती, तो वह उनकी किडनी ले ले और उन्हें कर्ज मुक्त कर दे। किसानों का कहना है कि उनके पास आगामी फसल के लिए बीज खरीदने तक के पैसे नहीं हैं और पुराना कर्ज बकाया होने के कारण बैंक उन्हें नया कर्ज नहीं दे रहे हैं।

विजय वडेट्टीवार का सरकार पर हमला

इस स्थिति पर संज्ञान लेते हुए कांग्रेस नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने राज्य सरकार पर कड़ा हमला बोला है। वडेट्टीवार ने इसे महाराष्ट्र के किसानों की असहायता का आक्रोश करार देते हुए कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि एक किसान को अपने अंग बेचने की बात करनी पड़ रही है।

उन्होंने सरकार को घेरते हुए प्रमुख सवाल उठाए कि चुनावी वादों का क्या हुआ? वडेट्टीवार ने पूछा कि चुनाव के दौरान किसानों के कर्ज मुक्त भूमि रिकॉर्ड करने का वादा करने वाली सरकार अब कहां है?, किसानों के खातों में कोई वित्तीय मदद नहीं पहुंची है और न ही उन्हें फसलों का उचित MSP मिल रहा है। उत्पादन लागत तक वसूल न होने के कारण किसानों पर कर्ज का पहाड़ बढ़ता ही जा रहा है।

पसीने की नहीं, तो खून की कीमत करो

विजय वडेट्टीवार ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि किसान भीख नहीं, बल्कि अपना हक मांग रहे हैं। उन्होंने तीखे लहजे में कहा, यदि आप उनके पसीने की कीमत नहीं दे सके, तो कम से कम उनके खून की कीमत तो कीजिए! उन्होंने मांग की है कि सरकार तुरंत पूर्ण कर्ज माफी का निर्णय ले, अन्यथा इस सरकार को हमेशा उस शासन के रूप में याद किया जाएगा जिसने किसानों को अपनी किडनी बेचने पर मजबूर कर दिया।

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