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बुलढाना में प्रकाश आंबेडकर ने जलयुक्त शिवार योजना पर खर्च और उसके वास्तविक लाभ को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
उन्होंने कहा कि जलसंकट और सूखे से प्रभावित लोगों को भोजन और पानी उपलब्ध कराना स्थानीय पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का दायित्व है।
प्रकाश आंबेडकर ने सवाल उठाया कि किसान पूरे समाज के लिए अनाज पैदा करता है, तो सूखे का संकट केवल किसान की समस्या कैसे हो सकता है?
Buldhana Dhamma Conference: जिन गांवों में पानी सूख गया है, लोगों के घरों में अनाज खत्म हो रहा है और रोजगार के अवसर नहीं हैं, ऐसे संकट के समय आम जनता के साथ खड़ा होना जरूरी है। जलयुक्त शिवार योजना देवेंद्र फडणवीस की लाडली योजना थी जिस पर करीब 2 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए, इसके बावजूद इन योजनाओं का वास्तविक लाभ कहां तक पहुंचा? कितने गांवों को पर्याप्त पानी मिला और यह पैसा कहां खर्च हुआ? सरकार को इन सवालों का जवाब देना होगा।
यह सवाल वंचित बहुजन आघाड़ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एड. प्रकाश आंबेडकर ने उठाए। उन्होंने राज्य में गंभीर जलसंकट, सूखे, किसानों की समस्याओं और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। बुलढाना के डी.एड. कॉलेज मैदान, त्रिशरण चौक के पास 'द बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया' (भारतीय बौद्ध महासभा) की बुलढाना जिला इकाई की ओर से जिला स्तरीय भव्य धम्म सम्मेलन और जनसभा का आयोजन किया गया था इस अवस पर वे बोल रहे थे।
इस कार्यक्रम में प्रा. अंजलि आंबेडकर, सुजात आंबेडकर भी उपस्थित थे। सभा को संबोधित करते हुए एड. प्रकाश आंबेडकर ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और जनता से अपने अधिकारों के लिए संगठित होने का आह्वान किया। नागरिकों की उपस्थिति कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय बौद्ध महासभा के पी.बी. इंगोले ने की। इस अवसर पर प्रा. अंजलि आंबेडकर, सुजात आंबेडकर, यू.जी. बोराले, राजेंद्र पातोडे, धैर्यवर्धन पुंडकर, नागोराव पांचाल, सविता मुंडे, नीलेश जाधव सहित अन्य वक्ताओं ने भी विचार व्यक्त किए।
एड. प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि सूखे की स्थिति में लोगों को पानी और भोजन उपलब्ध कराना सत्ता में बैठे स्थानीय पदाधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। उन्हें अपनी यह जिम्मेदारी हर हाल मे निभानी चाहिए। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो जनता को उनके घरों के सामने आंदोलन खड़ा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संकट के समय आम लोगों को अकेला छोड़ना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी से पीछे हटने जैसा है।
किसानों की समस्याओं पर सवाल उठाते हुए एड. प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि जब सूखा पड़ता है, तो उसे केवल किसान का संकट बताया जाता है। लेकिन किसान जो अनाज पैदा करता है, वह पूरे समाज के काम आता है। यदि किसान की उपज सबकी है, तो सूखे का संकट केवल किसान तक सीमित कैसे माना जा सकता है? सरकार को इस सवाल का जवाब देना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस भूमिका और प्रभावी उपाय दिखाई नहीं दे रहे है।