31 मई से खुलेंगे भीमाशंकर मंदिर के कपाट, कारोबार बढ़ने की उम्मीद लेकिन होटल व्यवसायी परेशान
Bhimashankar Temple Reopen News: साढ़े तीन महीने बाद 31 मई से भीमाशंकर मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खुलने जा रहा है। मंदिर खुलने से व्यापारियों में उत्साह है, लेकिन होटल व्यवसायी गैस संकट से परेशान हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
भीमाशंकर मंदिर फिर से खुल रहा है (सौ. सोशल मीडिया )
Bhimashankar Temple Reopen 2026: साढ़े तीन महीने के लंबे इंतजार के बाद तीर्थ स्थल भीमाशंकर मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खुलने जा रहे हैं, जिससे स्थानीय व्यापारियों में खुशी तो है लेकिन होटल व्यवसायियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
31 मई से मंदिर खुलने की खबर से पूरे परिसर में हलचल तेज हो गई है। लेकिन पिछले साढ़े तीन महीनों से मंदिर बंद रहने के कारण यहां पर्यटकों की संख्या न के बराबर थी। इस मंदी की वजह से कई होटल बंद करने पड़े और व्यवसायियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
होटल संचालकों के सामने गैस किल्लत की चुनौती
- अब जब व्यवसाय को दोबारा पटरी पर लाने की तैयारी शुरू हुई है, तो होटल संचालकों के लिए कर्मचारियों की कमी और गैस सिलेंडर की उपलब्धता सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरी है।
- मंदी के कारण अधिकांश कर्मचारी अपने गांवों की ओर पलायन कर चुके है। जिन्हें वापस बुलाना फिलहाल मुश्किल साबित हो रहा है, इसके साथ ही, कमर्शियल गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों और समय पर आपूर्ति न होने के कारण होटल मालिकों का बजट बिगड़ गया है।
ये भी पढ़ें :- पुणे में 23 दिन बाद खत्म हुई आरएमसी हड़ताल, 9 मई से दोबारा शुरू होंगे सभी प्लांट
सम्बंधित ख़बरें
पुणे में 23 दिन बाद खत्म हुई आरएमसी हड़ताल, 9 मई से दोबारा शुरू होंगे सभी प्लांट
पुणे के मोहम्मदवाड़ी समेत कई इलाकों को जल्द मिलेगी नियमित पानी सप्लाई, 95% काम पूरा
ईरान संकट के बीच भारत ने संभाली ऊर्जा व्यवस्था, पेट्रोल-डीजल की कीमतें रहीं स्थिर
हुतात्मा स्मारक की बदहाली पर मनपा सभा में हंगामा, सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी बहस
व्यवस्थाएं सुधरने की उम्मीद
मंचर और भीमाशंकर क्षेत्र के व्यवसाथियों, जैसे संजय वामनराव बाणखेले और बाबाजी निघोट का कहना है कि मंदिर खुलने से कारोबार में तेजी आने की उम्मीद तो है, लेकिन बढ़ता खर्च और कर्मचारियों का अभाव चिंता का विषय बना हुआ है। व्यापारियों को उम्मीद है कि जैसे-जैसे श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ेगी, वैसे-वैसे व्यवस्थाएं सुधरेगी, लेकिन फिलहाल नई शुरुआत के लिए उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है।
