भंडारा. 20 मार्च को ‘चिमनी बचाओ’ आंदोलन के लिए पूरे विश्व में ‘चिमनी डे’ के रूप में मनाया जाता है. शहर में सीमेंट के जंगलों के साथ-साथ मोबाइल टावरों के कारण चिड़िया की संख्या दिन-प्रतिदिन गिरती जा रही है. इन दिनों तेजी से घट रही पक्षियों की संख्या की वजह से लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए 20 मार्च को विश्व चिमनी दिवस के रूप में घोषित किया गया है.
भारत में हर जगह चिड़िया पाई जाती है. छोटे नाजुक चिड़िया को हमेशा घरों के आसपास और पेड़ों पर देखा जाता है. इस पक्षी की चहकती आवाज को सुनते हुए लोग सुबह उठते हैं. पक्षी से सीखने वाली एक बात यह है कि वह सुबह उठकर अपने काम पर लग जाती है. वह सुबह उठती है और अपने परिवार को खिलाने के लिए चारे की तलाश में जाती है.
कभी-कभी वह अपने काम में आलसी नहीं होती है. पक्षियों से सीखने के लिए बहुत कुछ है, फिर भी हम उनसे कुछ नहीं सीखते. चिड़िया दिखने में बहुत नाजुक है, चिड़िया के माथे पर, पूंछ एवं पीठ पर ग्रे है, कान के पास सफेद है, चोंच काली है. लेकिन अब मोबाइल टावरों के कारण चिड़ियों की संख्या तेजी से घट रही है. उनकी सुरक्षा करने की आवश्यकता है. इसलिए इस चिड़िया की अनोखी दुनिया के रक्षक हमें बनना चाहिए. इसीलिए लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए विश्व चिड़िया दिवस मनाया जाता है.
पूर्वजों का कहना था कि अगर चिड़िया को एक आदमी द्वारा छुआ जाता है, तो दूसरी चिड़िया इसे अपने समूह में या अपने समाज में नहीं ले जाती हैं क्योंकि एक आदमी का स्पर्श उनके लिए निषिद्ध माना जाता है. चिड़िया उच्च ऊंचाई पर अपने घोंसले का निर्माण करती हैं. ताकि कोई भी इंसान या जानवर उन्हें न छुए.
हाल ही में देखा गया है कि बढ़ती शहरीकरण एवं बढ़ती आबादी के कारण चिड़ियों की संख्या बहुत कम हो गई है क्योंकि बढ़ती आबादी, जिसमें आज डिजिटल युग शुरू हुआ है, इसके कारण बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण हो रहा है. हर किसी को एक मोबाइल फोन की आवश्यकता होती है, मोबाइल कंपनी के टावरों के बीच एक प्रतियोगिता होती है, इसलिए सभी बातों का विपणन शुरू हो गया है, अब फोरजी व फाईव्यूजी तकनीक के कारण उच्च आवृत्ति के टावर है.
इन टावरों से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेंज के उत्सर्जन को चिड़िया पर बड़ा प्रभाव दिखाया गया है, और खोज से पता चला है कि इलेक्ट्रॉनिक चुंबकीय रेंज के संपर्क में आने से चिडियों की मौके पर ही मौत हो जाती है, जिससे शहरों में चिडियों की संख्या में तेजी से गिरावट आती है. आधुनिक आवास एवं लापरवाह वनों की कटाई के कारण, चिड़ियों के घोंसलों के लिए कोई जगह नहीं है, और शहरों में भोजन की कमी से शहरों में चिड़ियों की संख्या में कमी आई है. चिड़िया की सुरक्षा के लिए जैव विविधता अनुसंधान एवं संरक्षण केंद्र शुरू किए गए है. चिडियों की सुरक्षा के लिए नागरिक एवं पक्षी प्रेमियों को आगे आने की जरूरत है.
पशु पक्षी जंगल की शोभा एवं महिमा हैं, मनुष्य के साथही उन्हें भी जीवन जीने का अधिकार है. प्रदूषण, खेतों पर कीटनाशकों का उपयोग, ग्लोबल वार्मिंग, मोबाइल टावरों पर रेडियो तरंगों के कारण चिड़िया पक्षियों को खतरा है. इस छोटे से जीव को बचाने के लिए 20 मार्च को विश्व चिमनी दिवस मनाया जाता है. पक्षियों का अस्तित्व, जो पर्यावरण के संतुलन में एक अमूल्य भूमिका निभाता है, वह अब खतरे में है.
चिड़ियों की सुरक्षा के लिए पक्षी प्रेमी आगे आते हैं और छतों पर चारे एवं पानी की व्यवस्था करते हैं. घर या इमारत बनाते समय, पक्षियों के लिए एक ईंट की जगह छोड़नी चाहिए. ताकि उनके घोंसले को सुविधाजनक एवं पानी से सुरक्षा में मदद हो. इसके लिए सभी को आगे आने की जरूरत है. विश्व चिड़िया दिवस पर आह्वान किया जा रहा है कि सभी को पक्षी के लिए चारा और पानी उपलब्ध कराकर संरक्षण की जिम्मेदारी लेनी चाहिए.