बावनथड़ी बांध का जलस्तर 65% पर, किसानों को रबी फसल की उम्मीद

Bhandara News: भंडारा जिले के बावनथड़ी बांध का जलस्तर 65% तक पहुंच गया है। इससे रबी फसल के लिए सिंचाई की उम्मीद जगी है। यह महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश की संयुक्त सिंचाई परियोजना है।
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बावनथड़ी बांध (फोटो नवभारत)
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Water Level Of Bawanthadi Dam: भंडारा जिले की तुमसर तहसील में स्थित बावनथड़ी नदी पर बने अंतर्राज्यीय बांध का जलस्तर हाल की बारिश के बाद बढ़कर 65% तक पहुँच गया है। इस वृद्धि ने स्थानीय किसानों में आगामी रबी फसलों के लिए सिंचाई की उम्मीद जगा दी है। यह बांध महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की एक संयुक्त परियोजना है, जो दोनों राज्यों के हजारों किसानों के लिए जीवनरेखा का काम करता है।

अगस्त के अंत तक बावनथड़ी बांध में केवल 31% जलभंडार था, जिसने किसानों की चिंता बढ़ा दी थी। लेकिन सितंबर की शुरुआत में हुई जोरदार बारिश ने जलस्तर को तेजी से बढ़ाकर 65% कर दिया है। पिछले साल इसी समय बांध 85% भरा था, जबकि उससे पहले के साल में यह 100% तक भर चुका था। इस साल जलभंडार उम्मीद से कम है, लेकिन सहायक अभियंता आर. आर. बडोले के अनुसार, अगर सितंबर के अंत तक और अधिक बारिश होती है तो बांध के पूरी तरह भर जाने की संभावना है।

अब तक, बावनथड़ी बांध से लगभग 5,000 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई हो चुकी है। यह पानी मुख्य रूप से खरीफ मौसम में धान की फसलों के लिए उपलब्ध कराया गया है। हालांकि, आगामी रबी और ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए पानी की उपलब्धता बांध के 100% भरने पर निर्भर करेगी। यदि ऐसा होता है, तो तुमसर-मोहाडी तहसील के किसानों के साथ-साथ मध्य प्रदेश के किसानों को भी पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिल सकेगी।

महाराष्ट्र के किसान परेशान

यह बावनथड़ी परियोजना महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बीच एक संयुक्त परियोजना है, लेकिन बांध के पानी का नियंत्रण मुख्य रूप से मध्य प्रदेश सरकार के पास है। महाराष्ट्र के किसानों को कब और कितना पानी मिलेगा, यह निर्णय वहीं से लिया जाता है। इस व्यवस्था के कारण कई बार महाराष्ट्र के किसानों को अपनी फसलों के लिए सिंचाई के पानी का लंबा इंतजार करना पड़ता है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर दोनों राज्यों के बीच समन्वय की आवश्यकता है ताकि किसानों को समय पर पानी मिल सके।

जलकर का बोझ और वसूली की चुनौती

बावनथड़ी परियोजना से कुल 76 गांवों की 17,000 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होती है। इसके बदले किसानों पर हर साल लगभग 4 करोड़ रुपये का जलकर बकाया होता है, लेकिन इसकी वसूली बहुत कम, केवल 10 से 15 लाख रुपये तक ही हो पाती है। जलकर की कम वसूली के कारण कर्मचारियों के वेतन और नहरों की मरम्मत जैसे आवश्यक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

राजस्व विभाग ने बकाया जलकर वसूलने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, किसानों का बकाया उनके 'सात बारह' (भूमि रिकॉर्ड) पर दर्ज करने की कार्रवाई शुरू हो गई है। लगभग 7 लाख किसानों पर करोड़ों रुपये का जलकर बकाया है, जो अब उनके लिए एक बड़ा बोझ बन चुका है।

किसानों को है उम्मीद

ताजा बारिश ने किसानों के चेहरों पर खुशी ला दी है। उन्हें उम्मीद है कि सितंबर के अंत तक बांध पूरी तरह भर जाएगा, जिससे खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा। यह पानी न सिर्फ उनकी फसलों को जीवन देगा, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति को भी बेहतर बनाने में मदद करेगा। हालांकि, जलकर बकाया और पानी के वितरण पर नियंत्रण जैसे मुद्दे अभी भी उनके लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

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