

Farmers Protest Land Acquisition New Expressway: भंडारा जिले के समृद्धि महामार्ग तथा विदर्भ में बनने वाले 4 नए एक्सप्रेसवे के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के विरोध में भंडारा, गड़चिरोली, गोंदिया और चंद्रपुर जिलों के प्रभावित किसानों ने सोमवार 24 अगस्त को जिलाधिकारी कार्यालय के सामने जोरदार आंदोलन किया।
शीघ्रसंचार द्रुतगति महामार्ग किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में निकाले गए मोर्चे के बाद धरना आंदोलन किया गया। शांतिपूर्ण तरीके से हुए इस आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान और नागरिक शामिल हुए।
सांसद प्रशांत पडोले ने भी आंदोलन में सहभागी होकर किसानों की मांगों का समर्थन किया।आंदोलकारियों ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर की जा रही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में किसानों को विश्वास में नहीं लिया जा रहा है। पिछले कई महीनों से शासन और प्रशासन को ज्ञापन देने, बैठकें करने तथा लगातार ज्ञापन और पाठपुरावा करने के बावजूद कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकला। इससे किसानों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
किसानों का कहना है कि खेती ही उनके परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है। ऐसे में उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित किए जाने से किसान परिवारों की रोजी-रोटी पर गंभीर असर पड़ेगा। इसलिए किसी भी परिस्थिति में अपनी कृषि भूमि देने के लिए तैयार नहीं हैं। आंदोलन के माध्यम से मांग की गई कि किसानों की सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए।
किसानों के कानूनी अधिकारों की रक्षा की जाए और किसी भी प्रकार की जबरदस्ती नहीं की जाए। इस अवसर पर शीघ्रसंचार द्रुतगति महामार्ग किसान संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष उमेश राऊत, उपाध्यक्ष दादाराव ठवकर, सचिव पौर्णिमा जिगनकर, अनिल हजारे, मंगेश जमणे, दादाजी एकटे, अध्यक्ष प्रकार मावारकर और अरुण हटवार सहित भंडारा, गड़चिरोली, गोंदिया तथा चंद्रपुर जिलों के बड़ी संख्या में प्रभावित किसान व नागरिक उपस्थित थे।
आंदोलकारियों ने कहा कि समृद्धि महामार्ग के विस्तार के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण का मुद्दा केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। विकास परियोजनाओं को लागू करते समय किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उन्हें विश्वास में लेना आवश्यक है।
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी कि यदि शासन ने किसानों की मांगों की अनदेखी की तो आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा। लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से राज्यव्यापी आंदोलन खड़ा करने का निर्णय भी इस दौरान व्यक्त किया गया।