तिरोड़ा में रबी धान खरीदी लिमिट बढ़ाने की मांग तेज, सरकारी केंद्र और मंडी भाव में 500 रुपये का बड़ा अंतर
Tiroda Paddy Purchase Center News: तिरोड़ा में किसानों ने रबी धान खरीदी की लिमिट बढ़ाने की मांग की है। सरकारी खरीदी केंद्र और मंडी भाव में 500 रुपये प्रति क्विंटल होने से किसानों को नुकसान हुआ है।
Paddy Purchase Center (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Tiroda Farmers News: खरीदी केंद्रों पर पंजीयन समय सीमा सरकार की ओर से 15 मई अंतिम तारीख थी। जिसके अनुसार किसानों ने ईपीक की प्रक्रिया पूरी कर ली। इस कार्यवाही के तहत अधिकांश किसानों ने ईपीक पूर्णत करा लिया। अब यह प्रक्रिया बंद हो गई। ईपीक के पश्चात किसानों ने आधारभूत खरीदी केंद्रों पर पंजीयनपटवारी से सातबारा, आठ अ ओरिजनल लेकर आधार कार्ड व बैंक पासबुक की जेरॉक्स ले जाकर आधारभूत खरीदी केंद्रों पर पंजीयन करा लिया। इसकी भी समय सीमा 15 मई आखरी थी।
यह प्रक्रिया संपूर्ण जिले के किसानों के लिए थी। आधारभूत केंद्रों पर पंजीयन से सरकार के पास कितने किसानों ने कितने एकड़ में धान उत्पादन किया इसका आकड़ा आ गया। जिसके अनुसार जिले के सभी आधारभूत केंद्रों को प्रति एकर 20 क्विंटल खरीदी का लक्ष्य सरकार ने रखा है। उसके अनुसार खरीदी का लक्ष्य सरकार ने केंद्र चालकों को देना चाहिए। लेकिन ऐसा न कर इससे आधि खरीदी की लिमीट सरकार देती है। लिमीट की सीमा बढ़ाए बगैर केंद्र चालक पंजीयन किया हुआ धान भी खरीदते नही व उसके नाम पर सरकारी रिकार्ड में चढ़ाते नहीं। क्योंकि यह सिस्टम ही ऊपर से बंद हो जाता है।
धान खरीदी में लिमिट कम
2,384 रु. प्रति क्विंटल घाटा सरकार कहती थी कि लागतमूल्य से 50 प्रश. मुनाफा जोड़कर भाव निश्चित करेंगे। सरकार की ही यंत्रणा आयोग कृषि मूल्य प्रति क्विंटल 4,753 रु. भाव मिलने की थी। केंद्रीय कृषि मूल्य आयोग 2,360 रु. निश्चित करता है। जिससे किसान को 2,384 रु. प्रति क्विंटल घाटा सहन करना पड़ता है। जिस पर जनप्रतिनिधि भी चुप्पी साधे बैठे हैं। किसानों की मांग है कि पंजीयन की समय सीमा व खरीदी की लिमीट बढ़ाई जाए। जिससे किसानों की समस्या कुछ हद तक सुलझकर राहत प्राप्त हो सकती है।
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MSP से कम दाम मिलने पर किसानों में नाराजगी
देखते हैं जनप्रतिनिधि व सरकार किसानों के प्रति क्या रवैया अपनाती है। खरीफ में खरीदा धान चढ़ाया जा रहा खरीफ सीजन में खरीदा हुआ धान भी कुछ केंद्रों का किसानों के नाम पर लिमीट नहीं बढ़ने से नहीं चढ़ाया गया था। अब रबी की जो लिमीट मिली है, इस पर जो खरीफ सीजन में किसानों से लिया हुआ धान उनके नाम पर नहीं चढ़ा था अब वह धान रबी सीजन की लिमीट में खरीफ का बचा धान चढ़ाया जा रहा है। कुछ केंद्र चालक कह रहे हैं कि हम रबी का धान नहीं खरीदेंगे जो लिमीट मिली है, उस पर खरीफ का धान चढ़ाएंगे।
प्रति क्विंटल 2,384 रुपये नुकसान का दावा
सरकार धान उत्पादक किसान के साथ भारी पैमाने पर अन्याय कर रही है। खरीफ का धान नहीं चढ़ाए जाने से इस का पैसा 5 माह से अटक गया। आधारभूत केंद्र के भाव में फरकआधारभूत खरीदी केंद्र पर प्रति क्विंटल 2,369 रु. व कृषि उपज मंडी में 1,800 रु. प्रति क्विंटल भाव मिल रहा है। जिससे खुले बाजार में 500 रु. प्रति क्विंटल कम मिलने से किसानों के सामने आर्थिक संकट निर्माण हो गया व सोच में पड़ गया। अब करे तो क्या करें, इस विचार में पड़ गया।
