Bhandara News: पवनी तहसील के पाहुनगांव में दिनदहाड़े बाघ के हमले से दहशत फैल गई. मंगलवार, 8 अप्रैल को एक पट्टेदार बाघ ने चर रही तीन गायों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया. घटना के बाद ग्रामीणों ने लंबे समय से लंबित पुनर्वास प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की मांग तेज कर दी है. जानकारी के अनुसार, पाहुनगांव के कुछ ग्रामीण अपने मवेशियों को गांव से कुछ दूरी पर स्थित चिचखेड़ा के खेतों में चराने ले गए. शाम करीब 4 बजे, जब गायें चारा खा रही थीं, तभी एक बड़े पट्टेदार बाघ ने अचानक हमला कर दिया. इस हमले में तीन गायें घायल हो गईं. मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने शोर मचाया, जबकि मवेशियों ने भी प्रतिकार किया, जिससे बाघ कुछ दूरी पर जाकर बैठ गया.
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग को अवगत कराया गया. सहायक वन क्षेत्र अधिकारी वैशाली सौंदड घटनास्थल पर पहुंचीं और घायल पशुओं के उपचार के लिए पशु चिकित्सक को बुलाने की व्यवस्था की. साथ ही ग्रामीणों को चेतावनी दी कि बाघ आसपास ही हो सकता है, इसलिए शाम ढलने से पहले सुरक्षित घर लौट जाएं. पुनर्वास प्रक्रिया शीघ्र पूरी करेंपाहुनगांव पवनी तहसील का एक अत्यंत दुर्गम क्षेत्र है. गांव का एक हिस्सा गोसीखुर्द बांध के पानी से घिरा है, जबकि बाकी तीन दिशाओं से यह पवनीउमरेडकरहांडला अभयारण्य के घने जंगलों से घिरा हुआ है.
यहां पहुंचने के लिए नियमित वाहन सुविधा उपलब्ध नहीं है. केवल जंगल के रास्ते पैदल, साइकिल या दुपहिया वाहन से ही आवागमन संभव है.गांव के लोगों का मुख्य व्यवसाय वन उपज संग्रह करना तथा पशुपालन है. इसी कारण ग्रामीणों का वन्यजीवों से अक्सर सामना होता रहता है.घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग के समक्ष पिछले 12 वर्षों से लंबित पुनर्वास प्रक्रिया पूरी करने की मांग को लेकर विरोध जताया. ग्रामीणों का कहना है कि वन्यजीवों के बढ़ते खतरे के बीच यहां रहना बेहद मुश्किल हो गया है.
वन विभाग के अधिकारियों ने उनकी मांग संबंधित उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया.बॉक्सपुनर्वास में देरी से बढ़ रही परेशानीमानव बस्तियों से दूर बसे पाहुन गांव के निवासियों का जीवन बेहद कठिन हो गया है. यह गांव उमरेडपवनीकरहांडला अभयारण्य की पुनर्वास सूची में शामिल है. ग्रामीणों के खेतों की गिनती भी की जा चुकी है, लेकिन अब तक पुनर्वास मुआवजा नहीं मिल पाया है.ग्रामीणों का आरोप है कि शासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण पुनर्वास प्रक्रिया अटकी हुई है. पाहुनगांव के पुनर्वास की मांग को लेकर पिछले चारपांच दिनों से वन विभाग कार्यालय के सामने सांकेतिक उपोषण भी शुरू है. लगातार हो रही घटनाओं से परेशान होकर 9 अप्रैल को बड़ी संख्या में महिलापुरुष भी आंदोलन में शामिल हुए. अब ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि क्या शासन किसी बड़े आंदोलन का इंतजार कर रहा है.