ग्राम रोजगार सेवकों का काम बंद आंदोलन शुरू
- Written By: नवभारत डेस्क
भंडारा. जिला ग्राम रोजगार सेवक संगठन ने मुख्यमंत्री, राज्य के रोजगार गारंटी योजना के मंत्री, जिला परिषद उपाध्यक्ष और प्रभारी खंड विकास अधिकारी भंडारा को ग्राम रोजगार सेवकों की विभिन्न मांगों के संदर्भ में बार –बार मांग पत्र भेजे. प्रत्यक्ष में अधिकारियों से मिलकर ज्ञापन सौंपा गया. लेकिन मांग पत्र में से एक भी मांग स्वीकार नहीं किए जाने के कारण 17 अक्तूबर से जिलाधिकारी कार्यालय के सामने बेमियादी आंदोलन किए जाने की चेतावनी दी गई.फिर भी अधिकारी नहीं जागे और मांगों को पूरा करने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाया.आखिर परेशान होकर ग्राम रोजगार सेवक संगठन जिला भंडारा ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने 17 अक्टूबर से काम बंद आंदोलन शुरू कर दिया है.
इस आंदोलन में संगठन के अध्यक्ष सेवकराम नागफासे,उपाध्यक्ष तुलसीदास बोकडे,कोषाध्यक्ष दिगांबर श्यामकुवर, सचिव रमेश नशीने, कार्याध्यक्ष सोविंदा हटकर, प्रचार प्रमुख डाकराम मिसार, सहसचिव शिवचरण खेत्रे, महासचिव शेखर पटले, संगठक होमदेव आकरे,संजय ठाकरे, मुकेश जगनाडे, कैलाश झोडे,सदस्य रमेंश खोकले, विश्वाज कोटांगले, राजेंद्र तिरपुडे, विोद ढोने, विदवान चिंचमलकर,भावराव राउत, मोतीराम कटरे, दिलीप शहारे, संजय भुरे, खुशाल बांडेबुचे, आश ठवकर,दुर्गा बालपांडे और बडी संख्या में ग्राम रोजगार सेवक उपस्थित थे.
क्या है मांगे
ग्राम रोजगार सेवक संगठन जिला शाखा भंडारा की ओर से बताया गया कि 8 मार्च 2021 के सरकार के निर्णय के अनुसार 2021-22 के मार्च 2022 का पारिश्रमिक अब तक नहीं मिल पाया है.यह परिश्रमिक ग्राम रोजगार सेवक के व्यक्तिगत खाते में जमा किया जाए.वर्ष 2022-23 का जून, जुलाई,अगस्त और सितंबर माह का मानधन अब तक नहीं मिल पाया है.
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2017 से 2021 तक का यात्रा भत्ता और जलपान भत्ता अभी भी नहीं मिला है. साथ ही 2021-22 का समायोजित अतिरिक्त मानधन भी नहीं मिला है.जिला संगठन के पदाधिकारियों ने प्रभारी खंड विकास अधिकारी को मांगों का एक ज्ञापन दिया कि सरकार ग्राम रोजगार सेवकों को एनएमएमएस के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार हैश्बशर्ते कि सरकार ग्राम रोजगार सेवकों के लिए एंड्रॉइड मोबाइल और नेट पैक उपलब्ध कराए.शासन निर्णय 8 मार्च 2021 में दर्ज रहने पर भी ग्राम रोजगार सेवकों के खाते पर मानधन जमा नहीं किया जा रहा है.
30 सितंबर तक मांगें नहीं मानने पर 1 अक्टूबर से कलेक्टर कार्यालय के सामने हड़ताल की चेतावनी दी गई थी.फिर भी सहानुभूति पूर्वक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया. जिला परिषद उपाध्यक्ष संदीप टाले एवं जिला परिषद के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी (रोगायो) ने 10 अक्टूबर तक मांगे मंजूर करने का आश्वासन दिया था.इसलिए अपना आंदोलन 10 अक्टूबर तक स्थगित किया था.इसके बाद भी मांगे नहीं मानी गई इसलिए आंदोलन का यह निर्णय लिए जाने की जानकारी दी गई.
