

Cage Wheel Road Damage: धान उत्पादक क्षेत्रों में किसानों द्वारा खेतों की जुताई और कचरे की सफाई के लिए ट्रैक्टर में लगाए जाने वाले केजव्हील का उपयोग इन दिनों आम हो गया है। यह विशेष प्रकार का लोहे का पहिया ट्रैक्टर के पिछले टायरों पर लगाया जाता है, जिससे गीली और दलदली जमीन में ट्रैक्टर आसानी से चल सके। लेकिन सार्वजनिक सड़कों के लिए यह एक गंभीर खतरा बनती जा रही है। केजव्हील में लोहे की रिंग, प्लेट और नुकीले खांचे होते हैं, जो खेतों में मजबूत पकड़ बनाने के लिए डिजाइन किए जाते हैं।
लेकिन जब किसान इन्हें हटाए बिना ही ट्रैक्टर को सड़कों पर ले आते हैं, तो इन कठोर और नुकीले हिस्सों से सड़कों की डामर परत उखड़ने लगती है। इससे सड़कों को गहरा नुकसान पहुंचता है और उनकी आयु तेजी से घटती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या अधिक देखने को मिल रही है, जहां ट्रैक्टर चालक खेतों से सीधे सड़कों पर आ जाते हैं।
इससे न केवल सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं, बल्कि दुपहिया वाहन चालकों और राहगीरों के लिए भी खतरा उत्पन्न हो गया है। कई बार सड़कों की उखड़ी सतह के कारण वाहनों के टायर पंचर हो जाते हैं या वाहन असंतुलित होकर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। विशेषकर रात के समय और वर्षा ऋतु में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह समस्या कई वर्षों से बनी हुई है, लेकिन अब तक संबंधित प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीण मार्गों पर तो स्थिति और भी खराब है, जहां पहले से ही सड़कें संकरी और कमजोर हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता अनिल चुघ ने कहा कि केजव्हील से सड़कों का काफी नुकसान होता है। कई जगह सड़क पर कीचड़ के कारण साइकिल एवं मोटरसाइकिल वाहन चालकों को रोजाना आनेजाने में परेशानी होती है।
स्थानीय साकोली पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक महादेव आचरेकर ने कहा कि, किसानों को भी जागरूक होने की जरूरत है। खेत से सड़क पर आते समय केजव्हील निकालना जरूरी है, तथा उसे धोने के बाद ही सड़क पर लाना चाहिए नहीं तो दुर्घटनाएं बढ़ सकती हैं।