Bhandara News: साकोली, सं. केसलवाड़ा/सानगडी क्षेत्र में निजी जमीन पर अतिक्रमण के मामले को लेकर पिछले कई दिनों से जारी अनशन आखिरकार प्रशासन के आश्वासन के बाद समाप्त हो गया.
आंदोलनकारी विलास मारोती सुखदेवे ने 16 मार्च से तहसील कार्यालय साकोली के सामने परिवार सहित अन्नत्याग आंदोलन शुरू किया था.तीन दिनों तक प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने के बाद मामला गंभीर होता जा रहा था.
इस बीच सामाजिक कार्यकर्ताओं की पहल पर प्रशासन हरकत में आया और उपविभागीय महसूल अधिकारी स्वाती देसाई की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई.बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारियों, आंदोलनकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा कर स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाए गए.
बैठक में यह सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि विवादित एवं अतिक्रमित जमीन की एक माह के भीतर मापजोख कराई जाएगी, ताकि मामले का स्थायी समाधान निकाला जा सके.इसके बाद नायब तहसीलदार श्यामराव शेंडे के हाथों नींबू पानी पिलाकर सुखदेवे का अनशन समाप्त कराया गया.
गौरतलब है कि केसलवाड़ा/सानगडी में सुखदेवे परिवार की गट क्रमांक 08 की लगभग 1.15 हेक्टेयर वडिलोपार्जित कृषि भूमि पर करीब 40 वर्ष पूर्व शासकीय निर्माण किए गए थे, जिनमें जिला परिषद स्कूल, आंगनवाड़ी, ग्राम पंचायत कार्यालय, घरकुल तथा मुख्य सड़क शामिल हैं.इस संबंध में परिवार ने कई बार प्रशासन को निवेदन दिए और आंदोलन भी किए, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकला.
खटखटाया न्यायालय का दरवाजा वर्ष 2008 में सुखदेवे परिवार ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिस पर 2011 में न्यायालय ने उनके पक्ष में निर्णय देते हुए अवैध निर्माण हटाने के आदेश दिए थे.हालांकि, प्रशासन ने इस फैसले के खिलाफ अपील की.समयसमय पर प्रशासन ने परिवार को वैकल्पिक जमीन देने का आश्वासन दिया, लेकिन यह प्रक्रिया अधूरी ही रही.
वर्ष 2025 में जमीन आवंटित की गई थी, जिसे बाद में दिसंबर में वापस ले लिया गया, जिससे परिवार में आक्रोश और बढ़ गया.इस पूरे मामले में सामाजिक कार्यकर्ता कैलास गेडाम, विलास मेश्राम, डी. वाय. बडोले और बिट्टू गजभिये की सक्रिय भूमिका रही.इनके प्रयासों से प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच संवाद स्थापित हुआ और समाधान का रास्ता निकला.