भंडारा में डिजिटल अरेस्ट का झांसा, रिटायर्ड बैंक अधिकारी से 40 लाख की ठगी, उड़ गई जीवनभर की कमाई
Cyber Fraud: भंडारा में साइबर ठगों ने सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी से डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 40 लाख की ठगी की। पुलिस ने 6 लाख फ्रीज कर रिकवरी प्रयास शुरू।
- Written By: प्रिया जैस
साइबर क्राइम (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Digital Arrest in Bhandara: भंडारा जिले में साइबर ठगों ने एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी को अपने जाल में फंसाकर उनकी पूरी उम्रभर की जमा पूंजीठग ली। ठगों ने अधिकारी को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी देकर उनसे 40 लाख रुपये ऐंठ लिए। घटना की शिकायत मिलते ही गुरुवार, 27 नवंबर को भंडारा साइबर पुलिस थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
पीड़ित सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी का नाम नत्थु यशवंत सोनकुसरे (63) है। 20 से 24 नवंबर के दौरान उन्हें दिल्ली से लगातार कई फोन आए। कॉल करने वाले ठगों ने दावा किया कि उन पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है और वे किसी भी समय गिरफ्तार हो सकते हैं। डर फैलाने के लिए ठगों ने वाट्सऐप पर फर्जी गिरफ्तारी वारंट भी भेजा।
इसके बाद उन्हें घर में क्वारंटाइन रहने के लिए मजबूर किया गया। कार्रवाई से बचने के नाम पर ठग लगातार पैसे मांगते रहे। दबाव में आकर सोनकुसरे ने 40 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से ठगों के बताए खातों में जमा कर दिए।
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पुलिस की ओर दौड़े तब खुला सच
ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का दबाव बनाकर पीड़ित को मानसिक रूप से भ्रमित कर दिया था। सोनकुसरे ने जब यह जानकारी गणेशपुर के जिला परिषद सदस्य यशवंत सोनकुसरे को दी, तब असली ठगी का पता चला। इस बीच ठगों ने उनसे और 25 लाख रुपये ट्रांसफर करने की मांग की थी।
बैंक जाकर ये राशि भेजने ही वाले थे कि यशवंत सोनकुसरे ने उन्हें समय रहते रोक लिया और तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। शिकायत के आधार पर साइबर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(सी) और 66(डी) के तहत मामला दर्ज किया है। जांच का दायित्व पुलिस निरीक्षक नितिन चिंचोलकर को सौंपा गया है।
पुलिस ने 6 लाख रुपये फ्रीज किए
स्थानीय अपराध शाखा के पुलिस निरीक्षक के अनुसार, 40 लाख रुपये की ठगी की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तुरंत बैंक से संपर्क कर 6 लाख रुपये फ्रीज कर दिए। शेष राशि की रिकवरी के प्रयास जारी हैं। पुलिस ने नागरिकों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अंजान व्यक्ति की धमकी पर विश्वास न करें और दबाव में आकर कोई वित्तीय निर्णय न लें। ऐसी स्थिति में तुरंत पुलिस या विश्वसनीय व्यक्ति से संपर्क करना आवश्यक है।
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क्या है डिजिटल अरेस्ट?
- डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगों की एक नई चाल है। इसमें ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य केंद्रीय जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन करते हैं।
- ठग पीड़ित को बताते हैं कि वह मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग तस्करी या बैंक फ्रॉड जैसे गंभीर अपराधों में फंसा हुआ है। उसके बाद वे व्हॉट्सऐप पर फर्जी एफआईआर, अरेस्ट वारंट और जांच कागज़ भेजते हैं, जिससे पीड़ित डर जाता है।
- ठग उसे घर से बाहर न निकलने और किसी से संपर्क न करने का निर्देश देते हैं। इसे ही डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है। इसके बाद कार्रवाई रोकने, गुनाह मिटाने या समझौते के नाम पर भारी रकम ट्रांसफर करने की मांग की जाती है।
