फौलादी इरादों से राकेश ने पाया खाकी का सम्मान: दो बार की विफलता को पछाड़कर नागपुर ग्रामीण पुलिस में हुए भर्ती
Maharashtra Police: मोहाडी के कान्हलगांव निवासी राकेश कुथे ने आर्थिक तंगी और दो बार की विफलता के बाद नागपुर ग्रामीण पुलिस में सफलता पाई। उनकी यह जीत कठिन परिश्रम और अडिग जिद्द की मिसाल है।
Bhandara News: भंडारा सपनों को पूरा करने के लिए केवल संसाधनों की नहीं, बल्कि फौलादी इरादों की जरूरत होती है। इसे सच कर दिखाया है मोहाडी तहसील के कान्हलगांव निवासी राकेश नागोराव कुथे ने। अत्यंत साधारण पृष्ठभूमि और आर्थिक तंगी के बीच पलेबढ़े राकेश ने सभी बाधाओं को पार करते हुए अंततः महाराष्ट्र पुलिस में भर्ती होने का अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है। उनकी यह सफलता केवल एक नौकरी का मिलना नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों पर संकल्प की जीत है।
राकेश के लिए यह राह आसान नहीं थी। घर की माली हालत खराब होने के बावजूद उन्होंने कभी अपनी शिक्षा और लक्ष्य के बीच गरीबी को नहीं आने दिया। पुलिस भर्ती की तैयारी के दौरान उन्होंने एक तपस्वी की तरह जीवन जिया।
जहां उनके उम्र के युवा त्योहारों और सामाजिक कार्यक्रमों में व्यस्त रहते थे, वहीं राकेश ने इन खुशियों से दूरी बनाए रखी। उनके लिए न कोई त्योहार था, न कोई उत्सव उनका पूरा ध्यान केवल अपनी फिटनेस और पढ़ाई पर केंद्रित था।
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राकेश की जीत के पीछे चार मुख्य स्तंभ रहेसटीक नियोजन, निरंतरता, कठोर परिश्रम और अडिग जिद्द। उन्होंने अपनी दिनचर्या को इस तरह ढाला कि पढ़ाई और शारीरिक परीक्षण के बीच बेहतर तालमेल बना रहे। रोज सुबह मैदान पर घंटों पसीना बहाना, दौड़ना और फिर पूरी एकाग्रता के साथ किताबों में डूब जाना उनकी सफलता का मूल मंत्र बना।असफलता को बनाया सीढ़ीराकेश के सफर में दो बार ऐसे मोड़ आए जब उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा।
पहले और दूसरे प्रयास में विफल होने पर कोई भी टूट सकता था, लेकिन राकेश ने हार मानने के बजाय अपनी गलतियों का विश्लेषण किया। उन्होंने हर विफलता को सीखने का एक मौका माना और तीसरे प्रयास में दोगुनी ऊर्जा के साथ मैदान में उतरे। उनकी इसी सकारात्मक सोच ने उन्हें नागपुर ग्रामीण पुलिस दल में स्थान दिलाया।
