पवनी में उमरेड-करहाड़ला अभयारण्य प्रभावितों का बेमियादी अनशन, 12 गांवों के पुनर्वास और मुआवजे की उठाई मांग
पवनी में 12 गांवों के पुनर्वास को लेकर ग्रामीणों का अनशन जारी। प्रशासनिक देरी से नाराज ग्रामीणों ने उठाई आवाज।
BhandaraWildlife Project News: पवनी उमरेड-पवनी-करहाड़ला अभयारण्य के विस्तार से प्रभावित 12 गांवों के पुनर्वास और मुआवजे का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण न होने से नाराज ग्रामीणों ने सोमवार से वन्यजीव परियोजना कार्यालय, पवनी के समक्ष बेमियादी अनशन शुरू कर दिया है। यह आंदोलन अन्यायग्रस्त कृती समिति के नेतृत्व में चल रहा है।
अभयारण्य विस्तार के तहत कई गांवों की जमीन अधिग्रहित की गई थी, लेकिन अधिसूचना के बाद भी पुनर्वास प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। जंगल से सटे क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीण आज भी जंगली जानवरों के खतरे के बीच जीवन यापन कर रहे हैं। खेती और मजदूरी पर निर्भर परिवारों का आरोप है कि प्रशासन उनकी समस्याओं की अनदेखी कर रहा है।
राजनीतिक समर्थन भी मिला
अनशन का नेतृत्व संयोजक अनिल मेंढे कर रहे हैं। आंदोलन स्थल पर पवनी नगराध्यक्ष डॉ. विजया राजेश नंदूरकर और भाजपा तहसील अध्यक्ष तिलक वैद्य ने पहुंचकर समर्थन दिया। इस दौरान बबलू वाघमारे, हरीश तलमले, अरविंद आसई, महेश गोनाडे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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प्रभावितों की प्रमुख मांगें
आंदोलनकारियों ने भूमि अधिग्रहण की दर तत्काल घोषित कर मुआवजा देने, प्रत्येक परिवार को 25 लाख रुपये का विशेष पैकेज देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। साथ ही बेरोजगारों को वन मजदूर के रूप में रोजगार उपलब्ध कराने, सभी प्रभावितों को प्रकल्पग्रस्त प्रमाणपत्र देने और विस्थापित गांवों के लिए समुचित पुनर्वास व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।
प्रशासन का पक्ष
वन विभाग के अनुसार, परियोजना के तहत 8 गांवों के पुनर्वास की प्राथमिक रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। अन्य विभागों की रिपोर्ट मिलने के बाद प्रस्ताव को मंजूरी के लिए आगे भेजा जाएगा। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि प्रभावितों की समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाएगा।
