प्याज़ उत्पादन घटने की संभावना
- Written By: नवभारत डेस्क
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अडयाल चिचाल. पवनी तहसील में अड्याल के नजदीक चिचाल क्षेत्र में हर साल बड़ी मात्रा में प्याज़ का उत्पादन होता है. हालांकि पिछले साल में हुए नुकसान की वजह से कई प्याज़ उत्पादकों ने इस साल प्याज़ से मुंह मोड़ लिया है. इसलिए इस साल प्याज के स्थानीय उत्पादन में गिरावट का अंदेशा व्यक्त किया गया है.
भंडारा जिले के पवनी तहसील के चिचाल क्षेत्र में खरीफ फसल के बाद नकद फसल के रूप में प्याज़ उगाया जाता है. हालांकि, प्रकृति का कोप, कीटनाशक, रासायनिक खाद् की बढ़ी कीमतों की वजह से प्याज़ उत्पादन पर खर्च बढ़ा है. अक्सर किसान को बे मौसम बारिश, आंधी, बारिश के हमले, तो कभी सूअर के हमले का सामना करना पड़ता है.
पिछले साल पवनी तहसील में करीब 900 एकड़ में प्याज़ लगाया गया. हालांकि प्याज़ के भाव नहीं आए. सरकारी समर्थन मूल्य खरीदी केंद्र नहीं होने की कमी के कारण, किसानों को गिरते हुए दामों पर बेचना पड़ा. चूंकि स्थानीय किसान को प्याज़ का लंबे समय तक संग्रहण संभव नहीं होता. इसलिए कइयों की प्याज़ की फसल खेत में सड़ गई हैं. वहीं दूसरी ओर प्याज खरीदने वाले व्यापारी जमाखोरी कर मालामाल हो गए.
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आधे हुआ उत्पादन क्षेत्र
पिछले साल की फसल की तुलना में इस साल सिर्फ 400 से 500 एकड़ में प्याज़ लगाया गया है. कई किसानों ने प्याज़ की जगह ग्रीष्मकालीन धान का सहारा लिया है.
पानी नहीं मिलने से नुकसान
किसानों ने चिचाल फार्म से गुजरने वाली मुख्य बायीं नहर से सटी जमीन पर खेती कर प्याज उत्पादन के लिए जमीन तैयार की थी. गोसीखुर्द परियोजना की बायीं नहर का स्थिरीकरण चलने की वजह से नहर में पानी नहीं छोड़ा गया. नतीजतन, कई किसानों ने प्याज नहीं लगाया.
प्रसंस्करण उद्योग की जरूरत
इसके अलावा, पवनी तहसील में कोई प्रसंस्करण उद्योग नहीं है. कृषि व्यवसाय को हमेशा नुकसान हुआ है, नतीजतन, नई पीढ़ी ने भी अपना रवैया बदल दिया है. प्याज उत्पादकों के लिए बेहतर दिनों के लिए पवनी तहसील में प्याज भंडारण केंद्र या प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने की आवश्यकता है.
ग्रीष्मकालीन उत्पादन की ओर रूख- शहारे
चिचाल कृषि सहायक एल.एल. शहारे ने बताया कि उत्पन्न अधिक आता है किंतु किसानों को बराबर दाम नहीं मिलने की वजह किसानों ने ग्रीष्मकालीन उत्पादन की ओर रूख किया है. कृषी विभाग द्वारा प्याज को एक मेट्रिक टन को 3 हजार 500 रुपये अनुदान मिलता है इसका किसानों ने लाभ लेना चाहिए.
