भंडारा में कुपोषण की तस्वीर चिंताजनक, 46 हजार बच्चों के सर्वे में 1,556 बच्चे मध्यम - गंभीर कुपोषित श्रेणी में

Bhandara Malnutrition: भंडारा जिले में 46,331 बच्चों के पोषण सर्वे में 942 बच्चे मध्यम कुपोषित और 153 बच्चे गंभीर कुपोषित श्रेणी में मिले। लाखांदुर में गंभीर कुपोषण का स्तर सबसे अधिक दर्ज किया गया।
Bhandara  Child Nutrition News
गंभीर कुपोषण का स्तरसोर्स- सोशल मीडिया
Published on
Updated on

Bhandara  Child Nutrition News: भंडारा जिले में राष्ट्रीय पोषण सप्ताह की पृष्ठभूमि पर भंडारा जिले में बच्चों कीपोषण स्थिति के आंकड़े कुपोषण के खिलाफ लड़ाई की गंभीरता को रेखांकित कर रहे हैं। जिले के सभी सात बाल विकास परियोजनाओं के अंतर्गत 0 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 46 हजार 331 बच्चों का सर्वेक्षण कर उनका वजन लिया गया।

इसमें 43 हजार 48 बच्चे यानी 92।91 प्रतिशत सामान्य श्रेणी में पाए गए। हालांकि, 2 हजार 822 बच्चे कम वजन के, 461 बच्चे तीव्र कम वजन के, 942 बच्चे मध्यम तीव्र कुपोषित यानी मैम श्रेणी के और 153 बच्चे अति तीव्र कुपोषित यानी सैम श्रेणी में पाए गए हैं।

इससे स्पष्ट होता है कि

भंडारा जिले में कुपोषण की दर को कम करने के लिए प्रशासन के साथ-साथ परिवारों की सक्रिय भागीदारी कितनी महत्वपूर्ण है। तहसीलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो अति तीव्र कुपोषित बच्चों की संख्या लाखांदुर परियोजना में सबसे अधिक है। यहां सर्वेक्षित 5,181 बच्चों में से 47 बच्चे सैम श्रेणी में हैं, जिनका प्रतिशत 0.91 है।

इसके बाद मोहाड़ी में 30, तुमसर में 19, लाखनी में 18, भंडारा परियोजना में 15, पवनी में 14 और साकोली में 10 सैम बच्चों की पहचान की गई है। सैम बच्चों के प्रतिशत के मामले में भी लाखांदुर 0।91 प्रतिशत के साथ शीर्ष पर है। मोहाड़ी में यह प्रमाण 0.39 प्रतिशत, लाखनी में 0।36 प्रतिशत, तुमसर में 0.22 प्रतिशत, पवनी में 0.24 प्रतिशत, साकोली में 0.20 प्रतिशत और भंडारा में 0.17 प्रतिशत है।

भंडारा जिले में कुल सैम बच्चों का प्रतिशत 0.33 है। मध्यम तीव्र कुपोषण मध्यम कुपोषित के मामले में मोहाड़ी परियोजना की स्थिति सबसे गंभीर है, जहां 201 बच्चे इस श्रेणी में पाए गए हैं। लाखांदुर में 156, भंडारा में 146, लाखनी में 145, तुमसर में 134, पवनी में 87 और साकोली में 73 बच्चे मैम श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। जिले में मैम बच्चों की कुल संख्या 942 है, जो कि 2।03 प्रतिशत है।


54 ग्राम बाल विकास केंद्र संचालित

अति तीव्र कुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने के लिए जिले में 54 ग्राम बाल विकास केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर सैम श्रेणी के बच्चों को 84 दिनों तक ऊर्जा-समृद्ध पोषण आहार प्रदान किया जाता है। साथ ही नियमित वजन, स्वास्थ्य जांच और आवश्यक दवाएं दी जाती हैं।

भंडारा जिले में महिला एवं बाल कल्याण विभाग आंगनवाड़ी के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए कई पोषण कार्यक्रम चला रहा है। गृह भेंट, परामर्श, स्वास्थ्य शिविर, पोषण सप्ताह और प्रदर्शनियों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाई जा रही है।

Bhandara  Child Nutrition News
भंडारा में खेत में घात लगाए बैठी थी मादा तेंदुआ, किसान पर किया हमला, दो शावकों के साथ भागी जंगल तरफ

जिले में 8,826 बच्चों का सर्वेक्षण कार्य पूरा

सर्वेक्षण के तहत जिले के 1 हजार 144 आंगनवाड़ी और 108 मिनी आंगनवाड़ी केंद्रों में कुल 46 हजार 331 बच्चों का शत-प्रतिशत वजन लिया गया। सबसे अधिक 8 हजार 826 बच्चों का सर्वेक्षण भंडारा परियोजना में हुआ। तुमसर में 8 हजार 725, मोहाड़ी में 7 हजार 753, पवनी में 5 हजार 764, लाखांदुर में 5 हजार 181, साकोली में 5 हजार 128 और लाखनी में 4 हजार 954 बच्चों की जांच की गई।

कुपोषण मुक्त भंडारा अभियान

भंडारा जिले में राष्ट्रीय पोषण कम हो रहा है और स्थिति में सुधार जिले में कुपोषण का स्तर धीरे-धीरे आया है। कुपोषण को शून्य पर लाने के लिए लगातार प्रयास जारी है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, पर्यवेक्षकों और आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से गांव स्तर पर जागरूकता फैलाई जा रही है, जिससे कुपोषण मुक्त भंडारा अभियान को बड़ी मजबूती मिल रही है।

- संजय जोल्हे, महिला एवं बाल कल्याण विकास अधिकारी।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com